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तेलंगाना सुरंग हादसे के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए आए रैट माइनर्स, जिसने बचाई थी 41 मजदूरों की जान

Telangana Tunnel Collapse: तेलंगाना के नगरकुर्नूल जिले में हुए टनल हादसे में आठ मजदूर तीन दिनों से फंसे हुए हैं। अब इनको सुरंग से बाहर निकालने के लिए रैट माइनर्स जो 31 अक्टूबर को उत्तरकाशी सुरंग ढहने के सफल बचाव अभियान का हिस्सा थे उन्हें बचाव अभियान के लिए नगरकुर्नूल बुलाया गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

48 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक फंसे लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इनलोगों को निकालने के लिये युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। इनमे एक यूपी के इंजीनियर तो चार झारखंड के मजदूर भी शामिल है। 12-13 फीट तक पानी भर गया, जिससे राहत कार्य प्रभावित हो रहा है। राहत कार्य के लिए विशेष तौर पर रैट माइनर्स को बुलाया गया है जिससे उम्मीद की नई किरण जगी है। वो एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम के साथ मिलकर काम करेंगे।

Telangana Tunnel Collapse

रैट माइनर्स करने वाले फ़िरोज़ क़ुरैशी ने मीडिया से बातचीत के करते हुए कहा उनकी टीम 31 अक्टूबर को उत्तरकाशी सुरंग ढहने के सफल बचाव अभियान का हिस्सा थे। मैं दिल्ली से आया हूं, हमारी पूरी टीम दिल्ली से आई है, कलेक्टर ने हमें यहां बुलाया है। हम 6 लोग यहां आए हैं और 6 और आएंगे, हम 12 लोगों की टीम हैं। उत्तराखंड में हमने 41 मजदूरों को बचाया था।

अभी तक हमें ज्यादा जानकारी नहीं मिली है। अभी तक हमें बताया गया है कि हमें एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों के साथ जाना होगा। जब तक हम वहां की स्थिति नहीं देख लेते तब तक कुछ कहना मुश्किल होगा। वहीं दूसरे रैट माइनर्स ने कहा दिवाली के दौरान उत्तराखंड में हादसा हुआ तो हमारी 12 सदस्यीय टीम ने मजदूरों को बचाया। पिछले 26 घंटे के ऑपरेशन में हमने हिस्सा लिया। वह स्थिति यहां से अलग थी। पानी के कारण दिक्कत हो रही है। थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन हमें उम्मीद है कि हम सफल होंगे।

रैट माइनर्स कैसे काम करते है?

यह माइन‍िंग का एक तरीका है जिसमे हाथ से छोटी-छोटी सुरंगें खोदी जाती हैं, जो करीब 3-4 फीट गहरी होती हैं, जिसके जरिए मजदूर अंदर घुसकर कोयला निकालते हैं। यह गड्ढा आमतौर पर सिर्फ एक व्यक्ति के उतरने और कोयला निकालने के लिए होता है। एक बार गड्ढे खुदने के बाद माइनर कोयले की परतों तक पहुंचने के लिए रस्सियों या बांस की सीढ़ियों का उपयोग करते हैं। फिर कोयले को फावड़े और टोकरियों जैसे उपकरणों का इस्‍तेमाल करके मैन्युअली निकाला जाता है। मेघालय में रैट होल माइनिंग मुख्य रूप से प्रचलित है।

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