दिल्ली को 6 महीने पीछे धकेल देगा शौकीन का शॉक

Arvind Kejriwal
नई दिल्ली। अरविंद केजरीवाल की सरकार को एक बड़ा शॉक लगने वाला है। यह शॉक निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन देने जा रहे हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि इससे सिर्फ केजरीवाल को प्रभाव पड़ेगा, तो आप गलत हैं। असल में यह झटका पूरी दिल्ली के लिये होगा।

खबर अब तक- केजरीवाल की सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन ने समर्थन वापस लेने का फैसला कर लिया है और सोमवार को वो लेफ्टनेंट गवर्नर नजीब जंग से मिलेंगे। और उन्हें औपचारिक चिठ्ठी सौंप देंगे। शौकीन के साथ जेडीयू विधायक शोएब इकबाल के जाने की संभावना भी बनती दिखाई दे रही है। ऐसा होने पर सरकार अल्पमत में आ जायेगी।

क्यों समर्थन वापस ले रहे हैं शौकीन- रामवीर के मुताबिक केजरीवाल दिल्ली देहात की अनदेखी कर रहे हैं। बिजली, पानी समेत कई मुद्दे हैं, जिन्हें केजरीवाल अनदेखा कर रहे हैं। 10 दिन पहले उन्होंने वो मुद्दे केजरीवाल के समक्ष उठाये थे, जिस पर मुख्यमंत्री ने 10 दिन का समय दिया था, लेकिन समय बीत गया और मुद्दे जस के तस।
क्या प्रभाव पड़ेगा दिल्ली पर- अगर दिल्ली की सरकार अल्पमत में आयी, तो सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लेकर आयेगी, इस विश्वास के साथ कि केजरीवाल उसमें निश्च‍ित तौर पर हार जायेंगे। अगर ऐसा हुआ तो दिल्ली की सरकार गिर जायेगी और राष्ट्रपति शासन लागू हो जायेगा। चूंकि अप्रैल मई में लोकसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा उसी के साथ विधानसभा चुनाव फिर से होंगे।

जनता पर प्रभाव- अगर दिल्ली में दोबारा चुनाव हुए, तो कौन सा दल सबसे ज्यादा सीटें लायेगा, यह सवाल सबके जहन में घूमेगा, लेकिन यह सवाल किसी के जहन में नहीं आयेगा कि इस पूरे घटनाक्रम से दिल्ली छह महीने पीछे हो जायेगी। पिछले चुनाव में आचार संहिता लागू होने के बाद सभी बड़े सरकारी फैसले थम गये और तीन महीने तक दिल्ली में न तो बड़ी घोषणा हुई और न ही बड़े फैसले। सरकारी बाबू से लेकर अध‍िकारी यह कहकर मौज करने लगे, कि अब जो होगा चुनाव के बाद होगा।

अब अगर दोबारा चुनाव हुए, तो वही माहौल फिर व्याप्त हो जायेगा और अगले तीन महीने के लिये फिर से दिल्ली की रफ्तार रुक जायेगी। घरों में पानी तो आता रहेगा, लेकिन अगले एक साल में पानी की किल्लत से निजात कैसे मिले यह प्लानिंग नहीं हो सकेगी, बिजली तो आयेगी, लेकिन कैसे बिजली कटौती रुके, कैसे बिल चोरी रोकी जाये, कैसे कीमतें कम की जायें इस पर कोई काम नहीं होगा। फ्लाइओवर बनने तो जारी रहेंगे, लेकिन जिन स्थानों पर हर रोज जाम लगता है, वहां अगर फ्लाईओवर बनाने की प्लानिंग होगी, तो सारे प्लान फाइलों में धूल चाटने चले जायेंगे।

दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने दिल्ली का 'मास्टर प्लान 2021' तैयार किया है, जिसके तहत दिल्ली में 10 लाख मकान और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की प्लानिंग है। यह प्लान पिछले चार महीने से रुका हुआ है। केजरीवाल की सरकार आयी, तो उसकी प्राथमिकता बिजली, पानी, जन लोकपाल और स्वराज बिल रही, इन सबके बीच यह मास्टर प्लान किनारे लग गया। जरा सोचिये अगर सरकार गिरी तो अगले छह महीने के लिये फिर से इस प्लान को लेकर चल रहे काम रुक जायेंगे और विकास की रफ्तार फिर से धीमी हो जायेगी। यह तो महज उदाहरण है, ऐसी 50 से ज्यादा बड़ी योजनाएं हैं, जो दिल्ली में सिर्फ इसलिये रुकी हुई हैं, क्योंकि हर रोज खबरें आती हैं, सरकार अब गिरी, तब गिरी।

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