Ram Temple Ayodhya: कश्मीर से कन्याकुमारी तक प्राण प्रतिष्ठा के दौरान कैसा रहा माहौल? तस्वीरों में देखिए
अयोध्या में भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमतौर पर पूरा देश उत्साहित रहा। कई जगहों पर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। लेकिन, फिर भी देश की सियासत की वजह से यह पवित्र अवसर भी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर बंटता नजर आया है।
ज्यादातर इंडिया ब्लॉक की पार्टियों की सरकारों वाले राज्यों ने इस महापर्व से खुद को दूर रखने की कोशिश की है। हालांकि, जहां तक आमलोगों की बात है तो उनमें भी इनमें से कुछ राज्यों में राजनीतिक विचारधारी की खाई स्पष्ट तौर पर महसूस की गई है।

कर्नाटक में उत्सव के जश्न में डूबे लोग
लेकिन, कुछ राज्यों में वहां की सरकार की भावना चाहे जो भी रही हो, जनता ने दिल खोलकर इस ऐतिहासिक उत्सव में हिस्सा लिया है। सबसे बेहतर उदाहरण कर्नाटक का है। यहां कांग्रेस की सरकार है। सरकारी स्तर पर इस आयोजन को समर्थन नहीं था। खुद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर अपनी भावना जाहिर की है।

उन्होंने लिखा है, 'आज मैंने अंजनेय की प्रतिमा के साथ भगवान राम के मंदिर का उद्घाटन किया, जिसका आयोजन भगवान राम मंदिर ट्रस्ट ने किया था। मैंने खुद नाम्मुर में श्री रामचन्द्र का मंदिर बनवाया है। हमने राजनीति के लिए यह नहीं किया है। हमारे राम, अयोध्या के राम, सभी राम एक ही हैं। जब मुझे समय मिलेगा मैं अयोध्या जाऊंगा।'
लेकिन, बेंगलुरु समेत पूरे कर्नाटक में आमतौर पर लोगों ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर आयोजित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों को पूरे उत्साह के साथ मनाया और शाम में दीपोत्सव में भी शामिल हुए। कमाल तो उत्तर कर्नाटक के एक गांव में हुआ, जहां मुसलमानों ने मस्जिदों में भगवान राम की तस्वीर रखकर दुआ मांगी।
तमिलनाडु में दिखा मिलाजुला असर
तमिलनाडु में डीएमके सरकार पर तो अयोध्या में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह का लाइव टेलीकास्ट जबरन रोकने के भी आरोप लगे हैं। उसे सुप्रीम कोर्ट में जवाब तक देना पड़ा। जहां तक प्रदेश की जनता की बात है तो इस आयोजन लिए उन्होंने अपनी दीवानगी शायद अपने घरों में ही दबाए रखी। उत्तर भारतीय राज्यों के मुकाबले यहां उत्साह फीका बताया जा रहा है। लेकिन, बीजेपी और संघ समर्थित संगठनों ने इसमें जरूर हिस्सा लिया।

केरल में बीजेपी-आरएसएस के समर्थन से हुए आयोजन
इसी तरह केरल की सरकार तो मुखर रूप से इस कार्यक्रम के विरोध में उतर आई थी। कई वामपंथी संगठनों ने इसका खुलकर विरोध किया। लेकिन, फिर भी बीजेपी-आरएसएस के समर्थन से कई धर्म स्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए गए और अयोध्या से सीधा प्रसारण देखने की व्यवस्था की गई। खुद राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान तिरुवनंतपुरम के वजुथाकौड रमादेवी मंदिर में मौजूद थे।

तेलंगाना में लोग काफी उत्साहित रहे
तेलंगाना में भी कांग्रेस की सरकार ने इन आयोजनों से दूरी बनाए रखी, लेकिन हैदराबाद समेत प्रदेश के बाकी हिस्सों में लोगों ने कई तरह से पूजा-पाठ का आयोजन किया और शाम में जमकर दिवाली मनाई। श्रद्धालुओं ने हैदराबाद के चारमीनार पर श्री भाग्य लक्ष्मी मंदिर में राम भजन का आयोजन भी किया था।

चंद्रबाबू नायडू अयोध्या में मौजूद रहे
इसी तरह पड़ोस के आंध्र प्रदेश में कई प्रमुख शहरों में एक दिन पहले से वातावरण राममय होने लगा था। राज्य सरकार तो इसमें सक्रीय तौर पर शामिल नहीं हुई, लेकिन विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालुओं की श्रद्धा जरूर उभर कर सामने आ गई। पूर्व सीएम और टीडीपी चीफ चंद्रबाबू नायडू खुद अयोध्या में मौजूद रहे।
गोवा में सीएम ने रुद्रेश्वर मंदिर में की पूजा
पश्चिम में गोवा की बात करें तो यहां भी बीजेपी की सरकार है और उसका असर सोमवार को भी देखने को मिला। मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत खुद पणजी स्थित रुद्रेश्वर मंदिर पहुंच और पूजा-अर्चना की।
कश्मीर में भी लगे जय श्रीराम के जयकारे
जहां तक कश्मीर की बात है तो यहां की फिजा पूरी तरह से देश के माहौल में ढलती जा रही है। राम लला की प्राण प्रतिष्ठा पर कुपवाड़ा स्थित टीटवाल में एलओसी के पास शारदा मंदिर से जय श्रीराम के जयकारे ऐसे लगे कि पाकिस्तान तक आवाज सुनाई पड़ी। इस मौके पर मां शारदा का मंदिर दीपों को रोशनी में नहा गया।

जबकि, जम्मू में तो राम लला के प्राण प्रतिष्ठा से केबल चालक इतने खुश हुए कि महामाया और महामाया से पीरखोह तक केबल कार से मुफ्त सैर करवाई।
बंगाल में राजनीति के आधार पर बंट गया धार्मिक आयोजन
पश्चिम बंगाल तो इस मौके पर भी पूरी तरह से राजनीतिक रंग में नहाया नजर आया। कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सभी धर्म के लोगों के साथ सद्भावना यात्रा निकाली और बीजेपी से लेकर इंडिया ब्लॉक में अपने साथियों पर जमकर सियासी वार किए।

वहीं बीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने स्तर पर धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करवाया। वैसे सूत्रों के मुताबिक राम के नाम पर दीपोत्सव मनाने का उत्साह कोलकाता में घरों के बाहर तो नजर नहीं आया, लेकिन बंगाल के ग्रामीण इलाकों में इसका काफी प्रभाव दिखा।
राम लला के रंग में राममय हुआ पंजाब
पंजाब में तो इसका खासा असर दिखा और लोगों ने पूरे दिन इस तरह के आयोजनों में हिस्सा लिया। अमृतसर स्थित दुर्गियाना मंदिर के शाम का नजार तो देखने लायक था।

बाकी देश के ज्यादातर हिस्सों में चाहे किसी भी दल की सरकार हो, वहां लोग पूरे उमंग और उत्साह के साथ सारा दिन पूजा-पाठ में भागीदार बने और शाम होते ही राम लला के आने की खुशी में घरों, दुकानों और कार्यालयों तक को दीपों से जगमग कर दिया।












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