मानसून सत्र के पहले दो सप्ताहों में राज्यसभा में सिर्फ 10 घंटे हुआ काम, 40 घंटे हंगामे की भेंट चढ़े
नई दिल्ली, अगस्त 02: मानसून सत्र में विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के चलते राज्य सभा के 50 में से 40 घंटे बेकार हो गए और केवल 10 घंटे ही काम हो सका। सरकारी स्रोत के मुताबिक, जारी व्यवधानों के साथ राज्यसभा की उत्पादकता चालू मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह के दौरान 13.70% तक गिर गई, जो पहले सप्ताह के दौरान 32.20% थी, जिसके परिणामस्वरूप पहले दो हफ्तों के लिए कुल उत्पादकता 21.60% थी।

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सरकार के मुताबिक, उपलब्ध कुल 50 कार्य घंटों में से 39 घंटे 52 मिनट व्यवधानों के कारण नष्ट हो गए हैं। हालांकि, सदन की बैठक निर्धारित समय से 1 घंटा 52 मिनट अधिक हुई, लेकिन जिसके चलते उत्पादकता काफी कम रही होगी। अब तक की 10 बैठकों के दौरान उच्च सदन में केवल एक घंटे 38 मिनट का प्रश्नकाल ही हो सका। चार विधेयकों को पारित करने के लिए केवल एक घंटे 24 मिनट का विधायी कार्य हो सका। हंगामे के चलते सदन में केवल एक मिनट का शून्यकाल हुआ और चार मिनट का विशेष उल्लेख।
पेगासस जासूसी कांड पर हो रहे हंगामे की वजह से सदन पिछले दो सप्ताह में एक भी दिन पूरी तरह से नहीं चल सका है। इस मुद्दे पर जहां विपक्ष लगातार बहस की मांग कर रहा है वहीं सरकार इसको मना कर रही है। दोनों सदनों में कुल 107 घंटों के कामकाजी में महज 18 घंटे ही कार्यवाही सुचारू रूप से चल सकी है। सरकार की दी गई जानकारी के मुताबिक इसकी वजह से सरकार को 133 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
19 जुलाई को मॉनसून सत्र शुरू होने के बाद से, लोकसभा ने संभावित 54 में से लगभग सात घंटे काम हुआ है। वहीं, राज्यसभा ने संभावित 53 में से 11 घंटे कार्यवाही चली है। मौजूदा सत्र में चल रहे गतिरोध के विपरीत, इस साल के बजट सत्र में रिकॉर्ड प्रोडक्टिविटी देखी गई थी। हालांकि, उस सत्र के शुरुआती कुछ दिन व्यवधानों से प्रभावित थे। लोकसभा की प्रोडक्टिविटी 110% थी, जबकि राज्यसभा के लिए यह 90% थी। सूत्रों ने कहा कि पहले सप्ताह के दौरान 4.37 घंटे तक कोविड-19 से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की गई। आईटी मंत्री ने पहले सप्ताह के दौरान पेगासस स्पाइवेयर मुद्दे पर एक बयान दिया।












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