क्या है वह 'अनोखा' नियम जिससे जीतकर भी चुनाव हार गए अभिषेक मनु सिंघवी?
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी की हार राज्यसभा के चुनावों के इतिहास को देखते हुए ऐतिहासिक माना जा रहा है। शायद ऐसा पहली बार हुआ है, जिसमें राज्यसभा चुनाव के किसी उम्मीदवार की हार या जीत का फैसला लकी ड्रॉ के माध्यम से हुआ है।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा की कुल 68 सीटों में से कांग्रेस के अपने 40 विधायक हैं और उसे तीन निर्दलीय एमएलए का भी समर्थन हासिल था। विपक्षी बीजेपी के पास सिर्फ 25 एमएलए हैं। इस वजह से राज्यसभा की एक सीट के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार और सुप्रीम कोर्ट के चर्चित वकील अभिषेक मनु सिंघवी की जीत पक्की लग रही थी।

टाई हो गए थे कांग्रेस-बीजेपी के वोट
लेकिन, मतदान के वक्त कांग्रेस के 6 विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने और तीनों निर्दलीयों के पाला बदलने से पार्टी का गणित बिगड़ गया और सिंघवी और भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन के पक्ष में 34-34 वोट पड़ गए।
क्या है नियम 75(4) ?
रिजल्ट टाई रहने की स्थिति में रिटर्निंग ऑफिसर को विजेता चुनने के लिए बहुत ही असामन्य तरीका अपनाना पड़ा। प्रदेश की एक राज्यसभा सीट के प्रतिनिधि को चुनने के लिए कंडक्ट ऑफ इलेक्शन रूल्स, 1961 के नियम 75(4) का इस्तेमाल किया गया।
सिंघवी की पर्ची निकली और हार गए चुनाव
इस नियम का इस्तेमाल तब होता है, जब राज्यसभा की एक सीट के लिए दो या दो से अधिक उम्मीदवारों के वोटों के मूल्य समान हो जाते हैं। इस तकनीक में परिणाम घोषित करने के लिए लकी ड्रॉ का इस्तेमाल होता है। लेकिन, विजेता वह नहीं होता, जिसकी लकी ड्रॉ निकलती है, बल्कि जिसकी नहीं निकलती, वही विजेता घोषित किया जाता है।
चुनाव आयोग के एक पदाधिकारी के अनुसार, 'रिटर्निंग ऑफिसर उम्मीदवारों के नाम वाली पर्ची बॉक्स में डालता है और ड्रॉ निकालने से पहले उसे अच्छी तरह से हिलाया जाता है। जिस उम्मीदवार की पर्ची निकल आती है, वह बाहर हो जाता है और जिसकी पर्ची बॉक्स में ही रह जाती है, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है।'
इस तरह से लकी ड्रॉ वाली पर्ची तो सिंघवी के नाम की निकली, लेकिन वह फिर भी यह बाजी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार हर्ष महाजन से हार गए, जिनकी वोटिंग से पहले तक जीत कोई भी संभावना नजर नहीं आ रही थी।
ईश्वर के द्वारा लिखा गया है-सिंघवी
शायद यही वजह है कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद सिंघवी ने पत्रकारों से कहा, 'यह सितारों में लिखा है और ईश्वर के द्वारा लिखा गया है। सामान्य ड्रॉ में जिसका नाम निकलता है, वह जीतता है। चुनाव आयोग के अजीब नियम के तहत बॉक्स से निकाला गया नाम जो मेरा था, हार गया... बाहर हो गया...। '
'पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार अपनाई गई'
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार अपनाई गई और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की मौजूदगी में रिटर्निंग ऑफिसर की निगरानी में सभी कार्यवाही पूरी की गई।
सूत्रों के अनुसार कांग्रेस की ओर से फैसले को लेकर अबतक कोई शिकायत भी नहीं मिली है। इससे पहले एक हाई वोल्टेज ड्रामा तब जरूर देखा गया, जब चुनाव आयोग ने एक कांग्रेस एमएलए को लाने के लिए सरकारी विमान के इस्तेमाल को लेकर बीजेपी की शिकायत खारिज कर दी।












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