Rajya Sabha Election 2025: कैसे होता है राज्यसभा सांसदों का चुनाव, कौन करता है मतदान? समझें पूरी प्रक्रिया
Rajya Sabha Election 2025: भारत के संसद की ऊपरी सदन को राज्यसभा कहते हैं। यहां के सदस्य लोकसभा की तरह प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए नहीं चुने जाते हैं, बल्कि उन्हें राज्यों के जनप्रतिनिधि चुनते हैं। तमिलनाडु की 6 और असम की दो राज्यसभा सीटों पर 19 जून को मतदान होने वाला है। इस वजह से राज्यसभा चुनाव एक बार फिर चर्चा में है। राज्यसभा के चुनाव में जिस राज्य की राज्यसभा सीट के लिए चुनाव होता है, उस राज्य के विधायक वोट डालते हैं। इसमें विधान परिषद के सदस्य हिस्सा नहीं लेते हैं। आइए समझते हैं राज्यसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया।
Rajya Sabha Election में वोट कैसे डाले जाते हैं?

Rajya Sabha Election की वोटिंग प्रक्रिया कैसे होती है?
विधायकों को उम्मीदवारों के नाम के आगे 1, 2, 3 के क्रम में प्राथमिकता देनी होती है। अगर किसी उम्मीदवार को पहली प्राथमिकता में ही पर्याप्त वोट मिलते हैं, तो वह विजेता माना जाता है। अगर पहली प्राथमिकता के आधार पर वोट नहीं मिलते हैं, तो दूसरे और तीसरे प्राथमिकता के वोटों की गिनती की जाती है।
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राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग क्या होती है?
राज्यसभा चुनाव में विधायकों को अपने मतपत्र पर उम्मीदवारों को प्राथमिकता क्रम में अंकित करना होता है। नियम के मुताबिक, विधायकों को अपनी ही पार्टी के या पार्टी की ओर से समर्थित उम्मीदवार को प्राथमिकता देनी होती है। कई बार कुछ विधायक इसके बजाय विपक्षी पार्टी के उम्मीदवार को वोट देते हैं, तो इसे क्रॉस वोटिंग कहा जाता है। इसका सबसे ताजा मामला हिमाचल प्रदेश की राज्यसभा सीट पर हुए चुनाव में दिखा था। कांग्रेस की प्रदेश में सरकार होने के बाद भी अभिषेक मनु सिंघवी जीत नहीं पाए थे।
राज्यसभा चुनाव में गुप्त मतदान क्यों नहीं होता है?
राज्यसभा चुनाव में विधायकों के लिए वोट डालते हुए पर्ची अपनी पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि को दिखाना जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्यसभा चुनाव में गुप्त मतदान नहीं किए जाने के पक्ष में फैसला दिया है। यह व्यवस्था Rule 39AA के तहत 2003 में लागू की गई थी। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए साल 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था। अगर कोई सदस्य अपना मतदान अधिकृत प्रतिनिधि को नहीं दिखाता है, तो उसके मत को अवैध करार दे दिया जाता है।
राज्यसभा चुनावों में गुप्त मतदान की व्यवस्था नहीं किए जाने के पीछे पार्टी के अनुशासन के साथ ही क्रॉस वोटिंग रोकना भी है। साथ ही, यह उच्च सदन के सदस्यों के निर्वाचन में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करता है।
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राज्यसभा में वोटिंग का फॉर्मूला
राज्यसभा के चुनाव में मतदान का एक अलग फॉर्मूला होता है। इसके तहत जिस राज्य से जितनी राज्यसभा की सीटें खाली होंगी, उनमें एक संख्या और जोड़ा जाएगा। इसके बाद जो नंबर आता है उसे कुल विधानसभा के सीटों की संख्या से भाग दिया जाता है। फिर जो नंबर आएगा उसमें फिर से एक जोड़ा जाता है। अब जो संख्या आती है उसके आधार पर उस राज्य में राज्यसभा का सांसद चुनने के लिए कितने विधायकों के वैध मतदान की जरूरत होगी, इसका पता चलता है।
जैसे कि उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा की सीटों के लिए मतदान होना है। अब 10 अंकों में एक जोड़ा जाएगा और कुल संख्या हो जाएगी 11। अब इस संख्या 11 को राज्य की कुल विधानसभा सीटों में भाग दिया जाएगा। अब जो संख्या निकल कर आई वो है 36.63, जिसे 36 ही माना जाएगा। अब इसमें आप 1 जोड़ दीजिए संख्या हो गई 37। यानी यूपी से एक राज्यसभा के सांसद को चुनने के लिए 37 विधायकों की जरूरत होगी।
तमिलनाडु और असम की 8 सीटों पर क्या गणित है?
असम की दोनों सीटों पर बीजेपी आसानी से जीतती नजर आ रही है। तमिलनाडु में DMK के तीन उम्मीदवार और चौथी सीट से कमल हासन की पार्टी (मक्कल निधि मय्यम) का उम्मीदवार राज्यसभा पहुंचेंगे। माना जा रहा है कि कमल हासन ही उम्मीदवार होंगे। बची हुई दो सीटों पर बीजेपी, एआईएडीएमके, वाईको के गठबंधन से दो उम्मीदवार राज्यसभा में जा सकते हैं। अब देखना है कि गठबंधन के बीच सीटों का बंटवारा किस तरह से होता है। हालांकि, अगर हिमाचल प्रदेश की तरह क्रॉस वोटिंग के हालात बने, तो बना बनाया खेल भी बिगड़ सकता है।












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