हथियार डील में मिले दलाली के पैसे को कांग्रेस के लिए यूज़ करना चाहते थे राजीव गांधी

Rajiv Gandhi wanted arms-deal commissions in Party coffers, says ex-CBI chief
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। लोकसभा चुनाव एक दम पास आ चुका है और सभी राजनीति दल एक दूसरे पर हमलवार हो गये हैं। वहीं राजनीतिक दलों की फंडिंग भी खासा विवादों में हैं। इसी बीच एक नई किताब ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व चीफ एपी मुखर्जी ने दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हथियारों के सौदे में मिले दलाली के पैसे को कांग्रेस पार्टी के लिये बतौर फंड इस्‍तमाल करना चाहते थे।

ये सनसनीखेज खुलासा अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्‍सप्रेस ने किया है। इंडियन एक्‍सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक एपी मुखर्जी ने राजीव गांधी से जून 1989 में हुई बातचीत के आधार पर अपनी किताब में ये दावा किया है कि राजीव गांधी हथियारों के सौदे में मिले कमिशन को कांग्रेस पार्टी के लिए बतौर फंड इस्तेमाल करना चाहते थे। इस किताब का नाम है 'अननोन फेसेट्स ऑफ राजीव गांधी, ज्योति बसु एंड इंद्रजीत गुप्ता'। उल्‍लेखनीय है कि राजीव गांधी का नाम बोफोर्स के दलाली के मामने में उछला था।

पूर्व सीबीआई डायरेक्टर मुखर्जी ने अपनी किताब में लिखा है, 'राजीव गांधी को सलाह दी गई कि ज्यादातर रक्षा डीलर 'रुटीन प्रैक्टिस' के हिसाब से जो कमिशन देते हैं, उसका इस्तेमाल कांग्रेस पार्टी के 'अपरिहार्य' खर्चों के लिए किया जाना चाहिए। राजीव ने इस बात को बढ़ावा दिया। वह चाहते थे कि इस पैसे का ठीक तरह से हिसाब रखा जाए और यह बेईमान अधिकारियों और नेताओं के हाथों में न पड़े।'

मुखर्जी ने आगे लिखा है, 'इससे देश भर में पार्टी के लिए ढेर सारा फंड जमा किया गया। इससे पार्टी के संगठन, मंत्रियों और उद्योगपतियों के बीच एक किस्म का 'बेशर्म गठजोड़' पैदा हो गया। राजीव ने मेरे साथ कॉफी पीते हुए बताया कि उन्हें इस बात का अंदाजा था।'

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