राजेश कालिया बने चंडीगढ़ के मेयर, कभी रास्तों पर घूमकर उठाते थे कूड़ा
चंडीगढ़। राजेश कालिया को चंडीगढ़ का नया मेयर चुना गया है। 46 साल के कालिया को शनिवार को हुए चुनाव में 20 में से 16 मत हासिल हुए और चंडीगढ़ के मेयर बन गए। राजेश के मेयर चुने जाने के बाद ना सिर्फ चंडीगढ़ में बल्कि देशभर में उनकी चर्चा हो रही है। इसकी वजह से है राजेश का बेहद गरीब परिवार से होना।

बचपन में चुना सड़कों से कूड़ा
राजेश कालिया वाल्मीकि समुदाय से आते हैं। बचपन से ही गरीबी से वो जूझते रहे। बचपन में उन्होंने सड़कों से कूड़ा करकट बीना। राजेश के पिता कुंदनलाल एक सफाई कर्मी के तौर पर रिटायर हुए। उनके एक भाई सफाई कर्मी के तौर पर कार्य करते हैं। वहीं 2016 में पार्षद बनने वाले राजेश कालिया अब चंडीगढ़ के मेयर बन गए हैं। जो उनके लिए किस ख्वाब से कम नहीं है।

जहां कूड़ा उठाया, पार्षद बन वहीं बाया दफ्तर
राजेश कालिया मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत जिले के मदीना गांव से ताल्लुक रखते हैं। राजेश कालिया छोटे ही थे जब उनके पिता चंडीगढ़ आ गए। बचपन में उन्होंने कूड़ा भी चुना। बाद में चंडीगढ़ नगर निगम में सफाई सेवक के तौर पर काम करने लगे। पार्षद का चुनाव लड़ा और पार्षद बने। वो बताते हैं कि जीत से ज्यादा खुशी इस बात की मिली कि जिस डंपिंग ग्राउंड में वह कूड़ा उठाते थे, वहीं पर पार्षद बनने के बाद उनका दफ्तर बना।

जेल में भी रह चुके
राजेश कालिया राम मंदिर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार भी हुए। वो 15 दिन आगरा की टुंडेला जेल में रहे। चेक बाउंस का एक केस भी कालिया के खिलाफ चल रहा है। राजेश का कहना है कि चंडीगढ़ को वो देश का सबसे स्वच्छ शहर बनाएंगे। वहीं अपनी तीनों बेटियों को भी वो उच्च शिक्षा देना चाहते हैं।












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