Rajasthan Politics: गहलोत-पायलट के टकराव के बीच बोली कांग्रेस- 'मिलकर लड़ेंगे और जीतेंगे'
कांग्रेस ने राजस्थान में पार्टी यूनिट के बीच फिर मतभेद उजागर होने के बाद दावा किया है कि अगला चुनाव एकजुट होकर ही लड़ेगी। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि पार्टी सर्वोपरि है और वह मिलकर लड़ेगी और जीतेगी।

कांग्रेस ने गुरुवार को एक बार फिर से यह दिखाने की कोशिश की है कि राजस्थान में पार्टी के अंदर कोई मतभेद नहीं है और सबकुछ चंगा चल रहा है। कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी सर्वोपरि है और वह राजस्थान चुनाव मिलकर लड़ेगी और जीतेगी भी। पार्टी की ओर से यह बयान पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की ओर से अपनी इस मांग पर अड़े रहने के बाद आया है कि अशोक गहलोत सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करे।
29 मई को हर मुद्दे पर चर्चा हुई थी-रमेश
राजस्थान में कांग्रेस नेताओं के बीच तनाव को लेकर सवाल पूछे जाने पर पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने कहा, '29 मई को कांग्रेस अध्यक्ष, राहुल गांधी, महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और राजस्थान के प्रभारी महासचिव सुखजिंदर सिंह रंधावा की मौजूदगी में मुख्यमंत्री गहलोत, सचिन पायलट से मिले और हर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की थी।'
राजस्थान में प्रचंड जनादेश के साथ वापस लौटेंगे-कांग्रेस
वे बोले, उन्होंने एकजुट होकर चुनाव लड़ने के लिए एकता, एकजुटता और दृढ़ संकल्प पर जोर दिया था। रमेश ने कहा, 'हम राजस्थान में प्रचंड जनादेश के साथ वापस लौटेंगे। 29 मई को जो चर्चा हुई थी, उसी को लेकर आगे बढ़ेंगे।'
'भ्रष्टाचार' पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं पायलट
दरअसल, बुधवार को अपने विधानसभा क्षेत्र टोंक में सचिन पायलट ने कहा था, उन मुद्दों पर कार्रवाई करनी होगी जो उन्होंने उठाए थे, विशेष रूप से भाजपा के पिछले शासन में 'भ्रष्टाचार' पर। उन्होंने पेपर लीक के बाद सरकारी नौकरियों की परीक्षा रद्द किए जाने का जिक्र करते हुए कहा था, 'जहां तक युवाओं के साथ न्याय का प्रश्न है, मुझे लगता है कि किसी तरह के समझौते की कोई संभावना नहीं है।'
हम यह चुनाव मिलकर लड़ेंगे और हम जीतेंगे- कांग्रेस
इसी से जुड़े सवाल पर प्रतिक्रया देते हुए कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, 'पार्टी सर्वोपरि है, हम यह चुनाव मिलकर लड़ेंगे और हम जीतेंगे।' उनके मुताबिक, 'हमने देखा है कि कर्नाटक में क्या हुआ...हमने देखा कि प्रधानमंत्री ने किस तरीके का चुनाव प्रचार चलाया। मुझे पूरा विश्वास है कि राजस्थान के लोग प्रधानमंत्री को वैसा ही जवाब देंगे, जैसे कर्नाटक के लोगों ने उन्हें दिया है।'
पायलट और गहलोत के साथ नेतृत्व ने की थी बैठक-सूत्र
कुछ हफ्ते पहले जब पायलट ने पिछली वसुंधरा राजे सरकार के दौरान कथित 'भ्रष्टाचार' के मामलों के खिलाफ राज्य सरकार से कार्रवाई की मांग की थी, तो राजस्थान कांग्रेस में घमासान बढ़ गया था। सूत्रों ने बताया कि इसको लेकर खड़गे और राहुल ने दोनों नेताओं के साथ सोमवार को अलग-अलग लंबी बातचीत की। बाद में उन्होंने फोटो भी खिंचवाए।
इन मैराथन बैठकों के बाद पार्टी की ओर से कहा गया था कि मुख्यमंत्री और पायलट आने वाला विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने के लिए तैयार हो गए हैं और सारे मुद्दों को पार्टी हाई कमान के पास हल करने के लिए छोड़ दिया है।
वेणुगोपाल ने किया था दोनों में सहमति होने का दावा
इस बैठक के बाद वेणुगोपाल ने कहा था, 'दोनों नेता अशोक जी और सचिन जी इन बातों के प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं।' जब उनसे पूछा गया कि किस प्रस्ताव की बात कर रहे हैं तो वे बोले, 'दोनों ने इसे हाई कमान पर छोड़ दिया है।' हालांकि, पायलट के करीबी सूत्रों ने कहा था कि उन्होंने जो मुद्दे उठाए थे, खासकर भ्रष्टाचार वाला वह अनसुलझा ही रह गया।
2018 से हो दोनों में चल रहा है सत्ता संघर्ष
उन्होंने कहा कि पायलट अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं और अगर कार्रवाई नहीं की गई तो वह इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। पायलट और गहलोत के बीच सत्ता का संघर्ष तभी से चल रहा है, जब 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी थी। 2020 में पायलट ने गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत किया था और तब जो उनकी डिप्टी सीएम की कुर्सी गई और प्रदेश अध्यक्ष का पद गया, वह फिर कभी नहीं लौटा।
पिछले साल कांग्रेस नेतृत्व ने राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की कोशिश भी की थी, लेकिन आखिरकार गहलोत के दांव के आगे उसे झुकना पड़ गया। चुनाव नजदीक आते देख पिछले महीने पायलट ने भी पार्टी की चेतावनी को अनसुना कर भ्रष्टाचार के कथित मामलों पर कार्रवाई को लेकर गहलोत सरकार की 'निष्क्रियता' को उजागर करने के लिए एक दिन का उपवास रखा था। (इनपुट-पीटीआई)












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