Rajasthan Political Crisis: तीन साल के थे पायलट जब मैं सांसद बना, वापस आएंगे तो गले लगा लूंगाः अशोक गहलोत

जयपुर। राजस्थान की सियासत में इस वक्त भूचाल आया हुआ है, पायलट खेमे के हाई कोर्ट जाने से लेकर ऑडियो टेप तक हर दिन सियासी पाटक के नए-नए अंक देखे जा रहे हैं, तो वहीं इसी बीत पायटव बनाम गहलोत को लेकर भाषणबाजी भी जबरदस्त ढंग से हो रही है, ऑडियो टेप को लेकर जहां कांग्रेस पायलट के सगे दो विधायकों को सस्पेंड कर चुकी है तो वहीं पायलट की याचिका पर आज हाई कोर्ट में भी सुनवाई है तो इसी बीच सीएम अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को लेकर बड़ा बयान दिया है।

'सचिन पायलट से कोई व्यक्तिगत परेशानी नहीं'

'सचिन पायलट से कोई व्यक्तिगत परेशानी नहीं'

न्यूज 18 को दिए गए इंटरव्यू में अशोक गहलोत ने कहा है कि मुझे सचिन पायलट से कोई व्यक्तिगत परेशानी नहीं है और ना ही वो सचिन पायलट के खिलाफ रहे हैं, उनकी बातों का हमेशा सम्मान किया है।

'सीनियर-जूनियर का माहौल बनाना ठीक नहीं'

राहुल गांधी भी जानते हैं जब कभी भी संसदीय बोर्ड की बैठक हुई, मैंने हमेशा युवाओं की पैरवी की है, अरे ये लोग कल का भविष्य है, इन लोगों को आगे नहीं बढ़ाऊंगा तो किसे आगे बढ़ाऊंगा ,सीनियर-जूनियर का माहौल बनाना ठीक नहीं है, मैं पिछले एक-डेढ़ साल से पायलट से बात नहीं कर रहा हूं क्योंकि वह मेरी सरकार के खिलाफ साजिश कर रहे थे। जब से मेरी सरकार बनी है वह सरकार गिराने की कोशिश में हैं।

'तीन साल के थे पायलट जब मैं सांसद बना'

'तीन साल के थे पायलट जब मैं सांसद बना'

गहलोत ने कहा कि अरे जब मैं सांसद बना था तो सचिन पायलट मात्र 3 साल के थे,उनका हमारा उनके घर आना-जाना था, अगर वो वापस आएंगे तो सबसे पहले मैं उनको प्यार से गले लगा लूंगा, मेरे मन में उनके प्रति क्या भावनाएं होंगी।

घनिष्ठता और प्रेम का अंदाजा लगाइए: गहलोत

घनिष्ठता और प्रेम का अंदाजा लगाइए: गहलोत

आप अंदाजा लगा सकते हैं, राजनीति में ऊपर-नीचे होता रहता है लेकिन व्यक्तिगत संबंध अपना होता है, उनके और मेरे परिवार का 40 साल का साथ रहा है, आप अंदाजा लगा सकते हैं घनिष्ठता और उनके प्रति मेरी भावनाओं का।

गहलोत ने कहा-पायलट को मसला पार्टी के अंदर सुलझाना चाहिए था

गहलोत ने कहा-पायलट को मसला पार्टी के अंदर सुलझाना चाहिए था

मालूम हो कि गहलोत इस बात से भी निराश हैं कि पायलट को जिन बातों से दिक्कत थी उसे वह सार्वजनिक मंच पर लेकर गए। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट को अपने मामले पार्टी के भीतर ही सुलझाना चाहिए था लेकिन पायलट को उस पार्टी को धोखा नहीं देना चाहिए जिसने उन्हें सबकुछ दिया। उन्हें जमीनी हकीकत की जानकारी नहीं है इसलिए वो ऐसा करते हैं हालांकि गहलोत ने यह भी कहा कि महत्वाकांक्षी होना गलत नहीं है लेकिन गलत खेलना ठीक नहीं है, गहलोत ने साफ कहा कि पायलट बीजेपी में जाना चाहते थे लेकिन उनके पास पर्याप्त नंबर ना होने की वजह से वो ऐसा नहीं कर पा रहे हैं।

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