Rajasthan Assembly elections 2018: चुनाव से पहले जानिए कुछ दिलचस्प आंकड़े

नई दिल्ली। राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार खत्म होने के साथ ही अब 7 दिसंबर को प्रदेश के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। एक तरफ जहां भाजपा ने इस बार दोबारा सत्ता में वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकी और पीएम मोदी से लेकर तमाम शीर्ष नेताओं ने यहां ताबड़तोड़ चुनावी रैलियां की। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने सत्ता विरोधी लहर को अपने पक्ष में भुनाने के लिए इस बार काफी आक्रामक चुनावी अभियान चलाया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि 11 दिसंबर को आने वाले चुनावी नतीजों में किस पार्टी का पलड़ा भारी साबित होता है। मतदान और चुनावी नतीजों के आने से पहले हम आपको प्रदेश के चुनाव से जुड़े कुछ दिलचस्प आंकड़े बताते हैं जिससे आपको इस बात का अंदाजा लगाने में आसानी होगी कि आखिरकार प्रदेश की राजनीति ने किस तरह से पिछले कुछ चुनावों में करवट ली है।

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प्रदेश में शहरी और ग्रामीण आबादी की बाद करें तो राजस्थान की कुल आबादी का 24.87 फीसदी आबादी शहरों में रहती है, जिनकी संख्या 17048085 है। जिनमे पुरुष आबादी 8909250 है जबकि 8138835 महिला मतदाता शामिल हैं। पिछले 10 सालों की बात करें तो प्रदेश की शहरी आबादी में 24.87 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश में शहरी शिक्षा के स्तर की बात करें तो यहां की औसत साक्षरता 79.68 फीसदी है, जिसमे 87.91 फीसदी पुरुष साक्षरता है और 63.81 फीसदी महिला साक्षरता है। लिहाजा प्रदेश में कुल पढ़े-लिखे लोगों की संख्या 11803496 है।

2011 के आंकड़ों के अनुसार

राज्य राजस्थान
राजधानी जयपुर
जिलों की संख्‍या 33
विधानसभा सीटों की संख्‍या 200
कुल जनसंख्‍या 6.85 करोड़
शहरी जनसंख्‍या 1.70 करोड़
ग्रामीण जनसंख्‍या 5.15 करोड़
जीडीपी (2018-19) ₹8.40 lakh crore
साक्षरता (2011) 66.10%
सेक्‍स अनुपात (2011) 928
सत्ताधारी पार्टी भाजपा
कुल मतदाता 4,74,79,402
कुल मतदान केंद्र 51,796

धार्मिक आंकड़े

धर्म आबादी औसत
हिंदू 60,657,103 88.49 %
मुस्लिम 6,215,377 9.07 %
सिख 872,930 1.27 %
जैन 622,023 0.91 %
ईसाई 96,430 0.14 %
उपलब्ध नहीं 67,713 0.10 %
बौद्ध 12,185 0.02 %
अन्य धर्म 4,676 0.01 %

प्रदेश में अहम चुनावी मुद्दों की बात करें तो सत्ता विरोधी लहर सबसे बड़ा मुद्दा है। इसके साथ ही प्रदेश में कानून-व्यवस्था भी ठीक नहीं है, यहां पीने के पानी की समस्या है। वहीं कई शहरों में बाल विवाह की समस्या काफी बड़ी समस्या है। भिलवाड़ा में 54, राजसामंद में 42, बूंदी में 38.4, झालवार में 36.6 और दौसा में 34.6 फीसदी बाल विवाह होते हैं। इसके अलावा प्रदेश के राजपूत और गुज्जर भाजपा से नाराज हैं, जिन्होंने 2013 में पार्टी को अपना समर्थन दिया था।

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