अब शायद क़िस्सों में ही रह जाएगा राज कपूर का आर के स्टूडियो
हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री के शो मैन कहे जाने वाले राज कपूर ने साल 1948 में आर. के स्टूडियो की स्थापना की थी.
यह स्टूडियो मुंबई के चेंबूर इलाके में 2 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. राज कपूर ने इस स्टूडियो का निर्माण तब करवाया था जब उन्होंने अपनी फ़िल्में बनानी शुरू की थीं.
साल 1988 में जब उनकी मौत हुई तब से लेकर अब तक इस स्टूडियो को उनका परिवार ही देख रहा था. लेकिन अब ख़बर है कि उनके तीनो बेटों रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर ने इसे बेचने का फ़ैसला कर लिया है.
राज कपूर ने इस स्टूडियो में पहली शूटिंग के तौर पर अपनी फ़िल्म आवारा का एक गाना फ़िल्माया था. वो गाना पूरे 9 मिनट का था जिसके बोल थे 'घर आया मेरा परदेसी आस लगी मेरी अंखियन की.'
इस गाने को खूब सराहना मिली और उसके साथ ही शुरू हुआ आर के स्टूडियो का सुनहरा सफ़र. यह स्टूडियो कई क्लासिक फ़िल्मों का गवाह बना. जैसे 'आग', 'बरसात', 'जिस देश में गंगा बहती है', 'श्री 420', 'मेरा नाम जोकर', राम तेरी गंगा मैली,' बॉबी, हिना.
जहाँ रिलीज़ से पहले राज कपूर करते थे हवन
'आर.के स्टूडियो हमारे लिए मंदिर था'
50 साल पहले मुंबई में अपना करियर बनाने आईं आशा रानी को अपने करियर का पहला ब्रेक राज कपूर ने दिया था. राज कपूर से उनकी पहली मुलाक़ात आर. के स्टूडियो में ही हुई थी.
आशा रानी की यादों में आर. के स्टूडियो सिर्फ़ एक स्टूडियो नहीं है बल्कि उन जैसे कई कलाकारों के लिए एक मंदिर है.
आर.के स्टूडियो में अपने बीते दिनों को याद करते हुए आशा रानी कहती हैं,"आज भले ही आर के स्टूडियो में किसी फ़िल्म या सीरियल की शूटिंग नहीं हो रही हो, लेकिन एक वक़्त ऐसा भी था जब लोग आर.के स्टूडियो में काम करने और अंदर से उसकी एक झलक देखने के लिए तरसते थे.''
वे बताती हैं, ''मुझे संगम फ़िल्म के लिए पहली बार मौका मिला था. राज कपूर साहब ने मुझे डांस आर्टिस्ट के तौर पर चुना था. मुझे आज भी याद है संगम फ़िल्म का गाना 'हर दिल जो प्यार करेगा वो गाना गाएगा' की शूटिंग हो रही थी और पूरा स्टूडियो रोशनी में चमचमा रहा था. आर.के स्टूडियो में डांस हॉल, थिएटर, बड़ी कैंटीन, बड़े-बड़े मेकअप रूम, आर्टिस्ट के लिए चेंजिंग रूम, हीरो-हीरोइन के लिए ख़ास कमरे थे."
देव आनंद कभी नहीं आए राज कपूर की होली में
'स्टूडियो को याद कर आंखें नम हो जाती हैं'
आशा रानी राज कपूर को याद करते हुए कहती हैं, "मैंने आर के स्टूडियो में राजकपूर साहब के साथ कई फ़िल्मों में डांस आर्टिस्ट के तौर पर काम किया. जब भी वो अपनी किसी फ़िल्म का नया गाना बनाते तो उसका ट्रायल हमें दिखाते थे. राज साहब हम सभी जूनियर आर्टिस्ट और अपने कर्मचारियों को इकट्टा कर स्टूडियो के थिएटर में ले जाया करते और कहते कि अगर मेरे इन बच्चों ने इस गाने को पास किया तो ये गाना फ़िल्म में रखूँगा, नहीं तो इसे फिर से शूट करवाऊंगा. मेरी पिक्चर का फ़ैसला कोई और नहीं मेरे साथ काम करने वाले मेरे ये बच्चे करेंगे.''
अपनी नम आंखों से आशा रानी कहती हैं, ''आर.के स्टूडियो की शानो शौकत को आज याद करती हूं तो आंखों में आंसू आ जाते हैं. यह स्टूडियो किस मुक़ाम पर था इस बात को लब्ज़ों में बयां करना बहुत मुश्किल है. राज साहब जितना वक़्त अपने घर में नहीं बिताते थे, उस से कहीं ज़्यादा वक़्त आर.के स्टूडियो में ही रहते थे. इसकी एक बड़ी वजह यह थी कि राज साहब ख़ुद हर चीज़ को जांचते-परखते थे चाहे कपड़े हों, मेकअप हो या सेट हो.''
देव आनंद से दोस्ती का गवाह
आर के स्टूडियो सिर्फ़ राज कपूर के लिए ही ख़ास नहीं था बल्कि कई दूसरे बड़े कलाकारों की भी इससे अपनी-अपनी यादें जुड़ी थीं. आर.के स्टूडियो कई शानदार पार्टियों का गवाह रह चुका है.
दिवंगत अभिनेता देव आनंद के मैनेजर रह चुके मोहन चुनरीवाला बताते हैं कि राज साहब, देव साहब और दिलीप साहब (दिलीप कुमार) भले बॉक्स ऑफ़िस में एक-दूसरे से प्रतिद्वंदी रहे हों, लेकिन उनकी दोस्ती बहुत गहरी थी.
मोहन चुनरीवाला उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं, ''मुझे आज भी याद है, राज साहब अपना मेकअप रूम किसी के साथ नहीं बांटते थे. लेकिन जब उन्हें पता चला कि देव साहब को एक मेकअप रूम की तलाश है, तो वे ख़ुद देव साहब के पास गए और उनसे अपना मेकअप रूम इस्तेमाल करने का आग्रह किया.''
''राज साहब अपनी हर नई फ़िल्म की शूटिंग शुरू करने से पहले आर के स्टूडियो में बहुत बड़ा हवन किया करते थे. आरके की होली और गणपति पूजा तो आज भी याद की जाती है. राज साहब के जाने के बाद भी देव साहब ने अपनी आख़िरी फ़िल्म चार्जशीट की शूटिंग वहीं की थी और अपने आख़िरी दिनों में वो अक़्सर स्टूडियो जाया करते थे. वहां कुछ वक़्त गुज़ारने के बाद देव साहब वापस अपने घर चले जाया करते थे.''
न्यूयॉर्क में राज कपूर फ़िल्म प्रदर्शनी
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