Maha Kumbh 2025: ट्रेन में 'कुंभ वॉर रूम', CCTV कैमरे.., कैसी है रेलवे की तैयारी?
भारतीय रेलवे ने प्रयागराज में संगम तट पर आयोजित हो रहे कुंभ मेले को लेकर विशेष व्यवस्था की है। कुंभ की शुरुआत के समापन तक यानी अगले 45 दिनों के भीतर प्रयागराज में लाखों तीर्थयात्रियों को पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में यात्रा सुरक्षित, निर्बाध और सुविधाजनक हो इसके लिए रेवले ने तैयारी पूरी कर ली है। रविवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ने बताया ने बताया कि कुंभ जाने वाले यात्रियों को लेकर रेलवे ने विशेष व्यवस्था की है, जिसके तहत 24x7 कुंभ वार रूम, सीसीटीवी कैमरे, बहुभाषी संचार प्रणाली और अतिरिक्त टिकट काउंटर शामिल हैं।
रेलवे बोर्ड ने कुंभ से जुड़ी परियोजनाओं पर तीन साल में 5,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस निवेश में 48 प्लेटफॉर्म, 21 फुट ओवर ब्रिज और एक लाख से ज़्यादा तीर्थयात्रियों की क्षमता वाले 23 स्थायी होल्डिंग एरिया शामिल हैं। इसके अलावा, 554 टिकट काउंटर (151 मोबाइल यूटीएस काउंटर सहित) और 21 रोड ओवर/अंडर ब्रिज भी हैं।

हाइटेक निगरानी और संचार सिस्टम
प्रयागराज क्षेत्र के नौ स्टेशनों पर वास्तविक समय की निगरानी के लिए कुल 1,176 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। प्रयागराज, नैनी, चोकी और सुबेदारगंज स्टेशनों पर तीर्थयात्रियों की सहायता के लिए 12 भाषाओं में एक नई घोषणा प्रणाली शुरू की गई है। इसके अलावा, आवश्यक जानकारी प्रदान करने के लिए 22 भाषाओं में एक सुविधा पुस्तिका तैयार की गई है।
कुंभ के दौरान रेलगाड़ियों का परिचालन व्यापक होगा। 10,000 नियमित रेलगाड़ियाँ और 3,134 विशेष रेलगाड़ियाँ होंगी, जो पिछले कुंभ के मुक़ाबले 4.5 गुना ज़्यादा हैं। इसके अलावा, तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए 1,869 छोटी दूरी की रेलगाड़ियाँ भी उपलब्ध होंगी।
बुनियादी ढांचे का विकास
3,700 करोड़ रुपये की लागत वाले बुनियादी ढांचे के विकास में बनारस-प्रयागराज और फाफामऊ-जंघई दोहरीकरण जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। यात्री ट्रेनों का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए मालगाड़ियों को समर्पित माल गलियारों की ओर मोड़ दिया गया है।
रेलवे बोर्ड स्तर पर चौबीसों घंटे काम करने के लिए एक समर्पित वॉर रूम का उद्घाटन किया गया है। परिचालन, वाणिज्यिक, आरपीएफ (रेलवे सुरक्षा बल), मैकेनिकल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल जैसे विभिन्न विभागों के अधिकारी गतिविधियों की निगरानी और समन्वय करेंगे। इस पहल का उद्देश्य तत्काल सहायता और परिचालन दक्षता के लिए जिला अधिकारियों और रेलवे कर्मियों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना है।
इस साल महाकुंभ में करीब 40 करोड़ तीर्थयात्रियों के आने की उम्मीद है। अकेले मौनी अमावस्या (29 जनवरी) को पांच करोड़ तीर्थयात्रियों के आने का अनुमान है। सुचारू संचालन के लिए विशेष रंगीन टिकट और बारकोड-सक्षम यूटीएस सिस्टम शुरू किए गए हैं।
ये पहल तीर्थयात्रियों के लिए प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित सुरक्षित, कुशल अनुभव प्रदान करने के लिए भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को उजागर करती हैं, साथ ही सांस्कृतिक और अवसंरचनात्मक उत्कृष्टता के प्रति इसके समर्पण को भी दर्शाती हैं।












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