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वन इंडिया की खबर पर मुहर, राहुल की ताजपोशी का सेफ गेम

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नई दिल्ली। आखिर वन इंडिया की खबर पर मुहर लग गई। हमने लिखा था कि राहुल गांधी की ताजपोशी को लेकर कांग्रेस खेमे में दो धड़े हैं। एक तो चाहता था कि वो गुजरात चुनाव के पहले अध्यक्ष बन जाएं और उनकी अगुवाई में चुनाव लड़ा जाए। दूसरा धड़ा चाहता था कि उन्हें अध्यक्ष पद चुनाव के बाद सौंपा जाए ताकि गुजरात में पराजय की स्थिति में कहीं राहुल के नेतृत्व की शुरूआत फीकी न हो जाए। हमने ये भी लिखा था कि कांग्रेस चाहती है कि सांप भी मर जाए और लाठी न टूटे कहावत के हिसाब से जाए और वही हुआ। कांग्रेस ने जो चुनाव कार्यक्रम तय किया है उस पर गौर फरमाने की जरूरत है। चुनाव की अधिसूचना एक दिसंबर को जारी की जाएगी और नामांकन चार दिसंबर तक भरे जाएंगे। पांच दिसंबर को नामांकन की जांच होगी और 11 दिसंबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। जरूरत पड़ी तो 16 दिसंबर को मतदान होगा और 19 दिसंबर को मतगणना की जाएगी। इसी दिन नतीजा घोषित कर दिया जाएगा।

हमने लिखा था...

हमने लिखा था...

हमने ये भी लिखा था कि सारी प्रक्रिया दिसंबर के पहले हफ्ते में होगी और वैसा ही कार्यक्रम बनाया गया है। यदि राहुल के खिलाफ कोई उम्मीदवार सामने नहीं आता है तो चार दिसंबर को ही तय हो जाएगा कि पार्टी की बागडोर राहुल गांधी के जिम्मे हो गई है और उससे कांग्रेस मीडिया की सुर्खियों में छाई रहेगी जिसका लाभ गुजरात चुनाव में पार्टी को मिलेगा।

कार्यक्रम सोच समझ कर तय किया गया

कार्यक्रम सोच समझ कर तय किया गया

दरअसल राहुल और सोनिया के करीबी वरिष्ठ सहयोगियों ने सारा कार्यक्रम सोच समझ कर तय किया है जिसमें न तो ये हो कि राहुल अध्यक्ष चुनाव के पहले औपचारिक रूप से घोषित हो और दूसरे चुनाव के पहले उनके नाम का डंका बज जाए। इसी हिसाब से चुनाव कार्यक्रम की रूपरेखा बनाने में मशक्कत हुई जिसमें दोनों बातें समाहित हो गईं। स्वाभाविक है कि उनके अलावा किसी और का नामांकन नहीं होना है तो चार दिसंबर को ही ये फाइनल हो जाएगा कि राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे जबकि औपचारिक ताजपोशी गुजरात चुनाव के बाद होगी।

कांग्रेस खेल रही सेफ गेम

कांग्रेस खेल रही सेफ गेम

साफ है कि पार्टी सेफ गेम खेलने चाहती है ताकि राहुल की अगुवाई वाली कांग्रेस को आगाज के साथ ही विरोधियों के तीर न झेलना पड़े। ऐसा माना जा रहा है कि संसद का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से शुरू किया जा सकता है। गुजरात चुनाव से फुर्सत पाने के बाद पार्टी संसद के भीतर और बाहर नए सिरे से राहुल के नेतृत्व में राजनीतिक सफर शुरू करेगी। इससे न केवल राहुल को आगे की रणनीति के लिए समय मिल सकेगा बल्कि उनकी टीम की सरंचना आगे के लिए बनाने में आसानी रहेगी। लंबे अरसे बाद पार्टी को नया नेतृत्व मिलना है और राहुल की टीम में भी स्वाभाविक रूप से बड़े पैमाने पर बदलाव देखने को मिलेंगे।

बुजुर्ग कांग्रेस नेता किनारे भी होंगे!

बुजुर्ग कांग्रेस नेता किनारे भी होंगे!

ऐसे वक्त में कई बुजुर्ग कांग्रेस नेता किनारे भी होंगे और कुछ युवा सहयोगी मेन स्ट्रीम में भी आएंगे। चुनाव के वक्त पार्टी के भीतर किसी तरह के मतभेद या मनभेद न उभरें, इसके लिए चुनाव कार्यक्रम के लिए ये मसौदा तैयार किया गया ताकि गुजरात चुनाव भी निपट जाएं और कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव भी वक्त पर संपन्न हो जाए।

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