बड़े काम की चीज है राहुल गांधी के जूते के नंबर की जानकारी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की जासूसी कराए जाने के आरोप का खंडन किया। फिर भी कांग्रेस सदस्यों व अन्य राजनीतिक पार्टियों ने इस मुद्दे पर सोमवार को संसद में जोरदार हंगामा किया। राज्यसभा में सदन के नेता और वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि वीआईपी लोगों के बारे में दिल्ली पुलिस की तरफ से सूचना इकट्ठी करना एक नियमित प्रक्रिया थी और सदस्यों से अपील की कि वे सुरक्षा विशेषज्ञों जैसा व्यवहार न करें।

Rahul Gandhi

राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजादी ने कहा कि धार्मिक और राजनीतिक आजादी देश में कम हो रही है। आजाद ने कहा कि वह कई साल से सांसद रहे हैं, लेकिन उनसे कभी इस तरह का सवाल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने कहा कि यह सुरक्षा के लिए था। मुझे यह बात समझ नहीं आती है। मुझे कई साल से जेड-प्लस सुरक्षा प्राप्त है, किसी ने मुझसे आज तक यह ब्यौरा नहीं मांगा। पुलिस ने उनके जूते की माप, उनकी आदतों, उनके साथी और साथियों की संख्या के बारे में पूछा। मुझे समझ नहीं आ रहा कि यह सब क्या हो रहा है।"

आजाद ने कहा, "क्या सरकार इस तरह जासूसी कराकर राजनीतिक पार्टियों को डराने की कोशिश कर रही है? क्या हमें यह कहने की कोशिश कर रही है कि अगर हम संसद के अंदर या बाहर आवाज उठाएंगे, तो केंद्र सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किसी भी तरह के हथकंडे का इस्तेमाल कर सकती है।" उन्होंने कहा, "धार्मिक आजादी खत्म हो रही है और अब राजनीतिक आजादी भी खत्म हो रही है। केंद्रीय गृहमंत्री को इस मसले पर बयान जारी करना चाहिए।"

उनकी बातों का समर्थन जनता दल-युनाइटेड (जद-यू) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने किया। जेटली ने कहा कि यह नियमित अभ्यास था, क्योंकि पुलिस को दिल्ली के लुटियन्स जोन में वाईआईपी की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत 1987 में कांग्रेस सरकार के दौरान हुई थी। मंत्री ने कहा, "आप इस मुद्दे को उठाकर तिल का ताड़ बना रहे हैं। जासूसी एक ऐसी प्रक्रिया है कि कोई चुपचाप करता है, फार्म भरने की बात कर्मचारियों को कहना जासूसी नहीं है।" उन्होंने कहा, "यह काम कांग्रेस सरकार में 1987 में शुरू हुआ था। 1990 में यह बदल दिया गया था।"

पुलिस ने राहुल के जूते की माप के बारे में क्यों पूछा था, इस सवाल पर जेटली ने कहा, "एक पूर्व प्रधानमंत्री, जिनकी हत्या की गई थी, उनके शव की पहचान जूते से ही हो पाई थी।" उन्होंने कहा, "हम सांसद हैं, हमें खुद को सीमित करना चाहिए। विशेषज्ञों द्वारा सुरक्षाकर्मियों को क्या सूचना दी जानी चाहिए यह उन पर छोड़ दें। जूता सुरक्षा के लिए प्रासंगिक हो सकता है।" मंत्री ने कहा कि प्रोफॉर्मा पूर्व प्रधानमंत्रियों एचडी देवगौड़ा, मनमोहन सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित अन्य वीआईपी को समय-समय पर भेजा गया है। इधर, विपक्षी सांसदों ने मुद्दे पर हंगामा जारी रखा और जेटली ने कहा कि सदस्यों को पुलिस रिकार्ड की जांच करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, "यह पिछले आठ महीने पहले से शुरू हुआ है, विपक्ष के नेता पुलिस रिकार्ड जांच लें और संप्रग सरकार के दौरान भी फार्म भरे गए थे। क्या मुद्दे को समाप्त करेंगे?" इधर, लोकसभा में कांग्रेस के नेता ने प्रधानमंत्री और गृहमंत्री दोनों से जवाब की मांग की। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने पिछले सप्ताह राहुल के कार्यालय में जाकर उनकी शारीरिक बनावट, उनके कद और आंखों व बालों के रंग सहित अन्य चीजों की पूछताछ की थी, जिस वजह से राजनीतिक विवाद शुरू हो गया था। दिल्ली पुलिस ने इसे नियमित अभ्यास का हिस्सा करार दिया था, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां इसे राजनीतिक जासूसी बता रही है।

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