सेना पर शंका, दुश्मन को मौका: राहुल गांधी की राजनीति क्या देश की एकता के लिए खतरा है?
Rahul Gandhi News: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और विपक्ष नेता राहुल गांधी ने हाल के महीनों में बार-बार ऐसे बयान दिए हैं जो भारती सेना और सुरक्षा एजेंसियों के प्रति उनके रुख पर गंभीर सवाल उठाते हैं। उनके इस तरह के बयान न केवल देश की रक्षा में लगे वीर सैनिकों के मनोबल को कमजोर कर सकते हैं, बल्कि आम जनता के बीच बेवजह का भ्रम और अविश्वास भी पैदा करते हैं।
राहुल गांधी ने कई मौकों पर भारत के सुरक्षा बलों की ईमानदारी और इरादों पर सवाल उठाए हैं। देश को आंतरिक और बाहरी खतरों से बचाने वाले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का समर्थन करने के बजाय राहुल गांधी इसपर राजनीति करते हैं। सैन्य और अर्धसैनिक बलों पर राहुल गांधी ऐसे समय में सवाल उठा रहे हैं, जब राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है।

🔴 जब राहुल गांधी ने कहा- डोनाल्ड ट्रंप के फोन कॉल पर PM मोदी ने सरेंडर कर दिया!
हाल ही में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पिछले महीने पाकिस्तान के साथ सैन्य झड़प के दौरान अमेरिका के दबाव के आगे झुकने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फोन कॉल के बाद पीएम मोदी ने सरेंडर कर दिया है।
राहुल गांधी ने एक्स पर कहा, ''ट्रंप का एक फोन आया और नरेंद्र जी तुरंत सरेंडर हो गए- इतिहास गवाह है, यही BJP-RSS का कैरेक्टर है, ये हमेशा झुकते हैं। भारत ने 1971 में अमेरिका की धमकी के बावजूद पाकिस्तान को तोड़ा था। कांग्रेस के बब्बर शेर और शेरनियां सुपर पॉवर से लड़ते हैं, कभी झुकते नहीं।''
राहुल गांधी के इस बयान को कांग्रेस पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स प्रमोट भी किया। कांग्रेस ने अपने हैंडल पर दो-पैनल वाला कार्टून पोस्ट किया: एक पैनल में ट्रंप को फोन पर "नरेंद्र, आत्मसमर्पण" चिल्लाते हुए दिखाया गया, जबकि दूसरे में मोदी को "हां, सर" कहते हुए दिखाया गया।
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने देश की सेना की ईमानदारी और पराक्रम पर सवाल उठाए हों -और वह भी उन क्षणों में जब राष्ट्रीय एकता और सेना का मनोबल सबसे जरूरी होता है।
🔴 बालाकोट एयर स्ट्राइक और उरी हमले के बाद भी राहुल गांधी ने उठाए थे सवाल
बालाकोट एयर स्ट्राइक और उरी हमले के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक के समय भी राहुल गांधी ने "वीडियो सबूत" की मांग कर सेना की कार्रवाई पर शंका जताई थी। इससे उन जवानों के बलिदान और पराक्रम पर आघात पहुंचा जो देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा देते हैं।
गलवान घाटी की घटना, जिसमें भारतीय सैनिकों ने चीन के खिलाफ बहादुरी से मोर्चा लिया, उस समय भी राहुल गांधी ने शहीदों को श्रद्धांजलि देने की बजाय सरकार की आलोचना और घटना का राजनीतिकरण करना ज्यादा जरूरी समझा।

🔴 क्या कांग्रेस को केवल भारतीय क्षति दिखाई देती है?
राहुल गांधी समेत कांग्रेस नेता बार-बार केवल भारतीय सैनिकों के नुकसान पर सवाल उठाते हैं, लेकिन पाकिस्तान को हुए भारी नुकसान को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें भी मानती हैं कि भारत की कार्रवाईयों से पाकिस्तान का आतंकी ढांचा बुरी तरह तबाह हो गया है। बावजूद इसके, राहुल गांधी इन रणनीतिक सफलताओं को मानने से इनकार करते हैं।
यह रवैया यह सवाल खड़ा करता है -क्या कांग्रेस पार्टी के लिए अब राजनीतिक अंक हासिल करना राष्ट्रीय हित से ज्यादा जरूरी हो गया है?
🔴 दुनिया के उदाहरण: जब विपक्ष ने दिखाई एकता
रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इजराइल-गाजा संघर्ष, वहां विपक्षी दलों ने युद्ध के समय अपनी सेनाओं और सरकार का समर्थन किया, चाहे उनकी राजनीतिक असहमति कितनी भी गहरी क्यों न रही हो। भारत को भी उसी एकजुटता की जरूरत है।
लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि राहुल गांधी और कांग्रेस ऐसे समय में राष्ट्र की एकता को तोड़ने वाले बयान दे रहे हैं, जब देश को सबसे ज्यादा सामूहिक समर्थन और विश्वास की आवश्यकता है।
🔴 देशभक्ति का मतलब शक नहीं, समर्थन है
भारत आज एक उभरती वैश्विक शक्ति है और हमारी सेना को पूरी दुनिया सम्मान की नजर से देखती है। सीमाओं की रक्षा करते हुए हमारे सैनिक हर दिन जान की बाजी लगाते हैं। ऐसे में यह उम्मीद करना कि कोई भी संघर्ष बिना हानि के हो, अवास्तविक है। और हर बार 'सबूत' की मांग करना हमारे सैनिकों के बलिदान का अपमान है।
राहुल गांधी के बयान देश की एकता को नुकसान पहुंचाती है और हमारे दुश्मनों का मनोबल बढ़ाती है। आज जब भारत को एकजुटता की जरूरत है, ऐसे समय में नेताओं को दलों से ऊपर उठकर देश की भावना को दर्शाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने हमेशा आतंकवाद और सुरक्षा मामलों में स्पष्ट नीति और संकल्प दिखाया है। अब समय है कि विपक्ष भी उसी गंभीरता, परिपक्वता और राष्ट्र प्रेम के साथ आगे आए।












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