2009 की जीत से चमके, 2019 आते-आते पूरी तरह से हुए फ्लॉप, जानें राहुल गांधी का पूरा राजनीतिक सफर
Rahul Gandhi: अदालत के फैसले आने के साथ ही राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता पर संकट के बादल मंडराने लगे थे और आज वही हुआ जिसकी सभी को आशंका थी।

गुरुवार को 'मोदी सरनेम' मामले में गुजरात के सूरत कोर्ट से सजा मिलने के बाद आज कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकसभा सदस्य के रूप में अयोग्य घोषित करार दिया गया है। शुक्रवार को राष्ट्रीय संसद के एक नोटिस में कहा गया कि राहुल गांधी की अयोग्यता उनकी सजा की तारीख से मानी गई है। बता दें कि राहुल गांधी को मोदी सरनेम मामले में दो साल की सजा हुई है जिसके बाद उनके ऊपर यह कार्रवाई की गई है। आइए जानते हैं राहुल गांधी का राजनीतिक सफर कैसा रहा है?
साल 2004 से राजनीति में प्रवेश
मार्च 2004 में राहुल गांधी ने मई 2004 का चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए राजनीति में अपने प्रवेश की घोषणा की। राहुल ने अपना पहला लोकसभा चुनाव अमेठी से लड़ा और 1 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से जीत दर्ज की। वह 14 वीं लोकसभा में एक सांसद बने।
साल 2004-2006
2004 - 2006 उन्हें गृह मामलों पर स्थायी समिति के सदस्य नियुक्त किया गया था।
साल 2007-2009
2007 - 2009 में उन्होंने मानव संसाधन विकास पर स्थायी समिति के सदस्य के रूप में कार्य किया। राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2007 के लिए कांग्रेस अभियान का भी नेतृत्व किया लेकिन असफल रहा। कांग्रेस ने 403 सीटों में से केवल 22 सीटें जीतीं।
साल 2009
साल 2009 में उसी क्षेत्र से 15 वीं लोक सभा के लिए फिर से निर्वाचित उन्होंने 370,000 से अधिक मतों के अंतर से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को हरा दिया। 2009 में कांग्रेस ने 21 लोकसभा सीटें जीतीं और क्रेडिट राहुल के पास गया। उन्हें 31 अगस्त 2009 को मानव संसाधन विकास पर स्थायी समिति के सदस्य नियुक्त किया गया था।
2009 में जीत से चमके थे राहुल गांधी
बता दें कि साल 2004 के बाद जब कांग्रेस साल 2009 के लोकसभा चुनाव में ज्यादा मजबूत होकर सामने आई तो उसका अधिकांश श्रेय राहुल गांधी को ही दिया गया। खासकर उत्तर प्रदेश में साल 2009 में जब कांग्रेस ने 21 लोकसभा सीटें जीतीं तो इसे पूरी तरह राहुल गांधी की सफलता बताकर पेश किया गया। कई जगह राहुल गांधी के पोस्टर लगाए गए थे। इसके बाद साल 2012 में उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने 2 महीने में 200 रैलियां की हैं। अंत में कांग्रेस ने 28 सीटें जीतीं।
साल 2013 में पार्टी में बढ़ा कद लेकिन शुरू हो गए बुरे दिन
2013 में राहुल को जनवरी 2013 में कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष पद पर पदोन्नत किया गया था। जिसके बाद से पार्टी में उनका कद और बढ़ गया लेकिन बुरा दौर शुरू हो गया। 2013 में कांग्रेस को त्रिपुरा, नगालैंड, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कारारी हार मिली।
साल 2014
2014 में राहुल को 16 वीं लोकसभा में फिर से निर्वाचित किया गया था। बाद में उन्हें विदेशी मामलों और स्थायी सलाहकार समिति के सदस्य, वित्त और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के स्थायी समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया।
2014 के लाकसभा चुनाव से राहुल गांधी बुरी तरह से फ्लॉप होने लगे
साल 2014 के लोकसभा चुनावों में महज 44 सीटों पर सिमट गई जिसके बाद से राहुल गांधी पर कई सवाल उठने लगे। इसके बाद इसी साल पार्टी ने हरियाणा और महाराष्ट्र में सत्ता गंवा दी। झारखंड, जम्मू-कश्मीर में भी उसकी करारी हार हुई। साल 2015 में बिहार से थोड़ी अच्छी खबर आई वह भी महागठबंधन का हिस्सा बनने के बाद। लेकिन साल 2015 में दिल्ली में बुरी तरह हार गई। साल 2016 और बुरा रहा। क्योंकि उत्तर पूर्व राज्य असम हाथ से निकल गया केरल में भी उसकी गठबंधन सरकार हार गई जबकि पश्चिम बंगाल में लेफ्ट के साथ चुनाव लड़ने के बावजूद उसका सूपड़ा साफ हो गया।
साल 2017
साल 2017 में राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए थे। अध्यक्ष बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी थी।
साल 2018
2018 विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने कर्नाटक के सभी 30 जिलों की यात्रा की। आखिरकार कांग्रेस ने 224 में से 80 सीटें प्राप्त की और राज्य में गठबंधन सरकार बनाने के लिए जेडीएस का समर्थन किया।
साल 2019 में भी लोकसभा में सूपड़ा साफ
2019 राहुल गांधी केरल के वायनाड लोक सभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर एक बार फिर संसद पहुंचे। साल 2019 के आम चुनाव में राहुल गांधी अमेठी, उत्तर प्रदेश से भी प्रत्याशी थे किंतु वे वहा भाजपा की स्मृति ईरानी से हार गए। बाद में राहुल गांधी ने आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी के दयनीय प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से त्याग पत्र दे दिया था।
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