'प्रधानमंत्री और मेरे साथ पत्नी वाला कोई मसला नहीं है', महिला आरक्षण पर चर्चा के बीच राहुल गांधी का बयान वायरल

Rahul Gandhi: संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी को लेकर चल रही ऐतिहासिक बहस के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नारी शक्ति की भूमिका पर अपना पक्ष मजबूती से रखा। देश के राजनीतिक पटल पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी और उनके अधिकारों को लेकर जारी इस चर्चा में राहुल गांधी ने उन्हें समाज की वास्तविक "ड्राइविंग फोर्स" करार दिया।

राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि भारत की राष्ट्रीय कल्पना और भविष्य के निर्माण में महिलाओं का योगदान अतुलनीय है। सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी ने न केवल महिलाओं को नीति-निर्माण में मुख्यधारा में लाने की वकालत की, बल्कि आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) जैसे तकनीकी और महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी अपने विचार साझा किए।

Rahul Gandhi

राहुल गांधी ने लोकसभा में बोलते हुए किन बातें पर दिया जोर?

लोकसभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने महिलाओं को भारतीय समाज और देश की प्रगति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि महिलाएं सिर्फ जनसंख्या का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे देश की सोच और कल्पना को आगे बढ़ाने वाली असली ताकत हैं।

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राहुल ने भावुक होते हुए कहा, "हर व्यक्ति अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ सीखता है और उनसे प्रभावित होता है। चाहे वह मां हो, बहन हो या पत्नी, महिलाओं का प्रभाव हमारे व्यक्तित्व और समाज की बनावट पर गहरा होता है।"

उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि महिलाओं का यह प्रभाव केवल घरों या निजी जीवन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि देश के बड़े फैसलों और राजनीति में भी उनकी आवाज साफ तौर पर सुनाई देनी चाहिए।

राहुल गांधी का संसद में "पत्नी वाला मुद्दा"

गंभीर विधायी चर्चा के बीच राहुल गांधी ने अपने चिर-परिचित मजाकिया अंदाज से सदन को हंसा दिया। विपक्षी और सत्ता पक्ष के बीच चल रही नोकझोंक के दौरान उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, "प्रधानमंत्री और मेरे पास 'पत्नी वाला मुद्दा' नहीं है..."। इस टिप्पणी पर सदन में मौजूद सदस्य अपनी मुस्कान नहीं रोक पाए। इस हल्के-फुल्के मजाक ने कुछ देर के लिए बहस की गर्माहट को कम कर दिया।

आरक्षण और परिसीमन पर कड़ा रुख

संसद में इस समय महिलाओं के लिए 33% आरक्षण और उसके बाद होने वाले परिसीमन को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। राहुल गांधी ने इस संदर्भ में कहा कि अब वह समय आ चुका है जब महिलाओं को विधायी संस्थाओं में उनका हक मिले।

राहुल ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना केवल एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि लोकतंत्र के संतुलन के लिए अनिवार्य है। चर्चा के दौरान उन्होंने पूर्व की तरह इस बार भी महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित करने की आवश्यकता पर संकेत दिए।

उनका तर्क था कि महिलाओं को कानून बनाने वाली संस्थाओं (संसद और विधानसभाओं) में पर्याप्त जगह मिलने से राजनीति ज्यादा समावेशी और बेहतर होगी।

भविष्य की राजनीति और महिलाओं की भूमिका

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी और विपक्ष महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि यह प्रक्रिया पारदर्शी हो और इसमें किसी भी वर्ग की अनदेखी न हो। उन्होंने मांग की कि महिलाओं की भूमिका को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय इसे कानून में ठोस जगह दी जाए ताकि वे देश की दिशा तय करने में सक्रिय भागीदार बन सकें।

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