'राहुल गांधी और कांग्रेस झूठ-धोखाधड़ी के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर', केंद्रीय मंत्री के बयान ने मचा बवाल
Rahul Gandhi SC-St: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर विदेशी टूलकिट के सहारे झूठ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने राहुल गांधी के उस दावे को खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के योग्य उम्मीदवारों को जानबूझकर Not Found Suitable (एनएफएस) घोषित किया जा रहा है ताकि उन्हें शिक्षा और नेतृत्व से दूर रखा जा सके।

'राहुल गांधी को इतिहास की जानकारी नहीं'
धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को झूठ और धोखाधड़ी के सबसे बड़े ब्रांड एंबेसडर बताया और कहा कि कांग्रेस की नेहरू-गांधी परिवार ने हमेशा SC, ST और OBC वर्गों के साथ धोखा किया है, लेकिन राजकुमार को अपने ही शाही परिवार के इतिहास की जानकारी नहीं है।
राहुल गांधी पर धर्मेंद्र प्रधान का पलटवार
प्रधान ने कहा, इसलिए कांग्रेस हर दिन विदेशी टूलकिट के आधार पर झूठ का पुलिंदा राजकुमार के सामने परोसती है। उन्होंने दावा किया कि 2014 में कांग्रेस के शासन के अंत तक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 57% SC, 63% ST और 60% OBC शिक्षकों के पद खाली थे। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्तियों का डेटा प्रस्तुत किया।
मोदी सरकार के कार्यकाल में अधिक नियुक्ति की गई
धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि 2004-14 के कांग्रेस शासन के दौरान IITs में केवल 83 SC, 14 ST और 166 OBC शिक्षक नियुक्त किए गए थे, जबकि NITs में 261 SC, 72 ST और 334 OBC नियुक्तियां हुई थीं। इसके विपरीत, उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के 2014-24 के कार्यकाल में IITs में 398 SC, 99 ST और 746 OBC शिक्षकों की नियुक्ति हुई, वहीं NITs में 929 SC, 265 ST और 1510 OBC शिक्षकों की नियुक्ति की गई।
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असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए PhD की अनिवार्यता खत्म
उन्होंने यह भी बताया कि मोदी सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए PhD की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है, जिससे अब वंचित तबकों के लिए अवसर और बढ़े हैं। प्रधान ने कहा, राहुल गांधी जिस 'नॉट फाउंड सुइटेबल' की बात कर रहे हैं, वह कांग्रेस की दलित-विरोधी, शोषित-विरोधी और वंचित-विरोधी सोच का परिणाम था। यह एनएफएस की परंपरा कांग्रेस की आज़ादी के बाद की नीतियों का परिणाम है, जिसने SC, ST और OBC के अधिकारों का हनन किया।
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