'पुर्ज़े विदेश से आते हैं, हम जोड़ते हैं', Make In India को लेकर राहुल गांधी ने मोदी सरकार को दी सलाह
Rahul Gandhi Nehru Place visit: देश की आर्थिक नीतियों पर बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है, और इस बार निशाने पर है केंद्र की बहुचर्चित 'मेक इन इंडिया' योजना। देश में फैक्ट्रियों का जाल बिछाने और आत्मनिर्भरता का सपना दिखाने वाली इस योजना पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बड़ा हमला बोला है।
नेहरू प्लेस के इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार से ज़मीनी साक्ष्य जुटाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि 'मेक इन इंडिया' सिर्फ एक प्रचार अभियान बनकर रह गया है। उन्होंने कहा कि आज भारत में ज्यादातर मोबाइल, लैपटॉप और टीवी सिर्फ असेंबल किए जा रहे हैं उनका वास्तविक निर्माण विदेशों में हो रहा है। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां न तो छोटे उद्यमियों को समर्थन देती हैं, न ही उत्पादन को बढ़ावा देती हैं।

न नीति है, न सपोर्ट। उल्टा, भारी टैक्स- राहुल
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया है जिसमें वे एक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में पहुंच कर मैन्युफैक्चरर से बात कर रहे हैं। वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने लिखा कि, क्या आप जानते हैं कि भारत में बने ज़्यादातर TVs का 80% हिस्सा चीन से आता है? 'मेक इन इंडिया' के नाम पर हम सिर्फ असेंबली कर रहे हैं - असली मैन्युफैक्चरिंग नहीं। iPhone से लेकर TV तक - पुर्ज़े विदेश से आते हैं, हम बस जोड़ते हैं।
छोटे उद्यमी निर्माण करना चाहते हैं, लेकिन न नीति है, न सपोर्ट। उल्टा, भारी टैक्स और चुने हुए कॉरपोरेट्स का एकाधिकार - जिसने देश के उद्योग को जकड़ रखा है। जब तक भारत उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं बनता, रोज़गार, विकास और "Make in India" की बातें सिर्फ भाषण रहेंगी।
ज़मीनी बदलाव चाहिए ताकि भारत असेंबली लाइन से निकलकर असली मैन्युफैक्चरिंग पावर बने और चीन को बराबरी की टक्कर दे सके।
बाज़ार नहीं, मैन्युफैक्चरिंग हब बनना होगा- राहुल
राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में दिल्ली के नेहरू प्लेस स्थित देश के सबसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार का दौरा करते हुए दो स्थानीय टेक्नीशियनों-शिवम और सैफ-से संवाद किया। उन्होंने कहा कि ये दोनों प्रतिभाशाली युवक हैं, लेकिन देश का आर्थिक ढांचा उनकी क्षमताओं को उड़ान नहीं दे पा रहा। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने यह सवाल उठाया कि जब 'मेक इन इंडिया' के तहत फैक्ट्रियों का बूम लाने का वादा किया गया था, तो आज भारत की मैन्युफैक्चरिंग जीडीपी सिर्फ 14% पर क्यों सिमट गई है? उन्होंने कहा कि युवा बेरोजगारी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी है, और चीन से आयात दोगुना हो गया है।
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बहुचर्चित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन पर सवाल
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की बहुचर्चित उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि इस योजना को अब चुपचाप बंद किया जा रहा है, जबकि इससे बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग और निवेश बढ़ाने की उम्मीद की गई थी। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा किए गए अपने पोस्ट में राहुल ने लिखा, अगर हम खुद निर्माण नहीं करेंगे, तो हमेशा दूसरों से खरीदते रहेंगे। भारत को अब सिर्फ बाज़ार नहीं, बल्कि एक मज़बूत निर्माण केंद्र बनने की जरूरत है। इसके लिए ईमानदार सुधार और घरेलू उत्पादकों को वास्तविक वित्तीय सहयोग मिलना चाहिए।
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