कब संसद में तैयारी करके बोलेंगे राहुल गांधी
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) क्या लोकसभा में राहुल गांधी तैयारी करके नहीं बोलते? लगता यही है। वे मंगलवार कोलोकसभा में भूमि अधिग्रहण विधेयक पर बोले।

सूटबूट की सरकार
वे बोले, सूटबूट की सरकार। वे क्या कहना चाहते है, ये किसी को समझ नहीं आया। उनके भाषणों को सुनकर लगता है कि उनमें कहीं तारतम्यता नहीं होती। वे तैय़ारी के साथ संसद में भाषण नहीं देते।
चुनावी भाषणों में शायद यह चल भी जाता। आम सभा में बोलते तो भी आलोचना होती, लेकिन ज्यादा आपत्तिजनक नहीं होता। लोकसभा में इस तरह की भाषा का प्रयोग दुखद है और अस्वीकार्य है चाहे कोई भी पार्टी कोई भी नेता बोले।
किस तरफ इशारा
राहुल गांधी का इशारा आखिर किस ओर है? चूंकि उन्होंने अपने भाषण में सूटबूट का विशेषण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संदर्भ में ही किया था, इसलिए इस भाषण का निशाना स्वाभाविक ही उन्हें माना जाएगा। वरिष्ठ चिंतक अवधेश कुमार कहते हैं अगर ऐसा है तो यह राहुल गांधी की छवि के लिए अच्छा नहीं है।
कसर पूरी करते
अज्ञातवास या विपश्यना या राजनीति का जहां से भी प्रशिक्षण लेकर वे आए हैं लोकसभा में न बोलने की अपनी सारी कसर पूरी कर रहे हैं। यह ठीक भी है। संसदीय लोकतंत्र में एक प्रभावी नेतृत्व वाला सशक्त विपक्ष चाहिए।
आरोप नहीं
अभी तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या उनकी सरकार पर किसी तरह भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। फिर वो सूटबूट वाला चोर किसे कह रहे हैं? हैरानी की बात ये है कि उस समय सभापति के आसन पर बैठे लोकसभा के उपाध्यक्ष एम थम्बीदुरई ने इस शब्द को रिकॉर्ड से बाहर निकालने के लिए आदेश नहीं दिया।
लेकिन इससे भाजपा को राहुल पर हमला करने का मौका मिल गया है कि किस तरह 10 वर्ष तक चोरी करने वाले आज सादा कपड़ा पहनकर दूसरे को चोर कह रहे हैं। राहुल गांधी क्या ऐसा ही विपश्यना का प्रशिक्षण लेकर आए हैं जिसमें कि इस तरह के अपशब्दों का प्रयोग किया जाता है?












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