राहुल गांधी की नागरिकता पर फिर सवाल! सुब्रमण्यम स्वामी ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका, लगाए बड़े आरोप
Rahul Gandhi Citizenship: नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर एक बार फिर से सवाल खड़े किए जा रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanian Swamy) ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपनी याचिका में दिल्लीॉ हाईकोर्ट में एक अहम मांग रखी है।
राहुल गांधी की नागरिकता के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में दायर ताजा याचिका में दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) से गृह मंत्रालय (MHA) को अहम निर्देश देने की मांग की है। बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस याचिका में कांग्रेस नेता व लोकसभा में विपक्ष के नेता की भारतीय नागरिकता रद्द करने के उनके प्रतिनिधित्व के निर्णय को लेकर निर्देश देने की मांग की है।

दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में स्वामी ने दावा किया है 10 अक्टूबर 2005 और 31 अक्टूबर 2006 को दाखिल कंपनी के वार्षिक रिटर्न में राहुल की राष्ट्रीयता ब्रिटिश बताई गई। इसके अलावा, 17 फरवरी 2009 को कंपनी के विघटन आवेदन में फिर से राहुल की राष्ट्रीयता ब्रिटिश बताई गई।
ऐसे में स्वामी ने याचिका में दावा किया कि यह स्थिति भारत के संविधान के अनुच्छेद 9 और भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 का उल्लंघन करती है। दरअसल, भारत के संविधान के अनुच्छेद 9 में घोषणा की गई है कि कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं होगा या भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा। स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर ली हो।
संविधान के अनुच्छेद 9 का जिक्र करते हुए कहा था कि इसके मुताबिक वह किसी एक देश के ही नागरिक हो सकते हैं। सिटिजनशिप ऐक्ट 1955 के नियमों के मुताबिक उनसे भारत की नागरिकता छीन लेनी चाहिए। यदि कोई नागरिक दूसरे देश की नागरिकता लेता है तो फिर उसे भारत की नागरिता छोड़नी होगी।
केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में राहुल गांधी को अप्रैल 2019 को एक नोटिस भी भेजा गया था। स्वामी ने अब अदालत से मांग की है कि वह सरकर से इस मुद्दे पर कार्रवाई का स्टेटस पूछे।
कब-कब उठा राहुल गांधी की नागरिकता का मुद्दा?
- वर्ष 2016 में इस मामले को संसद की आचार समिति में उठाया गया था, जिसके अध्यक्ष भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी हैं।
- रपट के मुताबकि, राहुल गांधी ने कभी ब्रिटिश नागरिकता पाने की कोशिश नहीं की। य शिकायत उनकी छवि खराब करने की एक साजिश का हिस्सा है।
- दिसंबर 2015 में सर्वोच्च न्यायालय ने नागरिकता के संबंध में पेश किए गए सबूतों को खारिज किया था। इस बार याचिका वकील एम.एल. शर्मा ने दायर की थी, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने फर्जी बताया।
- सर्वोच्च अदालत ने 2015 में याचिका के साथ पेश किए गे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए थे। तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एच.एल. दत्तू की अध्यक्षता वाली पीठ में शामिल न्यायमूर्ति दत्तू ने शर्मा ने कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "सेवानिवृत्ति के बस दो दिन शेष बचे हैं, आप मुझे मजबूर मत कीजिए कि मैं आपके ऊपर जुर्माना लगा दूं।"
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