Rahul Gandhi के Operation Sindoor पर हर वार को बेअसर करने के लिए ही चुने गए G-23 वाले नगीने, समझें इनसाइड गेम
Rahul Gandhi News: ऑपरेशन सिंदूर पर राहुल गांधी लगातार सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश में भी पीएम मोदी पर सवाल उठाते हुए 'नरेंद्र सरेंडर' जैसे तंज का इस्तेमाल किया है। हालांकि, ऑल पार्टी डेलिगेशन में गए कांग्रेस नेता ही उनकी मुश्किलें बढ़ाते नजर आ रहे हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बताने वाले डेलिगेशन का चुनाव करते हुए बीजेपी ने कांग्रेस सांसदों का चयन बहुत बारीकी से किया है।
इसमें शशि थरूर और सलमान खुर्शीद जैसे नाम शामिल किए गए जो विदेश मामलों के जानकार हैं। साथ ही, मनीष तिवारी और आनंद शर्मा जैसे नेताओं को भी जोड़ा गया। इन सीनियर नेताओं को सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी के अंदर राहुल के विरोधियों में शुमार किया जाता है। समझें पूरा खेल।

Rahul Gandhi के हर वार को उनके ही नेता कर रहे नाकाम
राहुल गांधी जब देश के अंदर ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार को घेरने में जुटे हैं, तब देश के बाहर उनके पार्टी के कुछ नेता भारत का पक्ष समझा रहे थे। कांग्रेस पार्टी के अंदर ही विचारों का टकराव सलमान खुर्शीद और शशि थरूर जैसे लीडर्स के बयानों से झलक रहा है। थरूर और खुर्शीद पर कांग्रेस के जयराम रमेश समेत दूसरे लीडर्स हमला बोल रहे हैं। इस पर पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा भी था कि यह दुख की बात है कि देशभक्त होने की वजह से हमें निशाना बनाया जा रहा है।
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बीजेपी कांग्रेस पार्टी के इस बिखराव पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं चूक रही है। पार्टी के नेताओं के लिए भी यह असहज स्थिति है। कांग्रेस के कई प्रवक्ता सार्वजनिक मंचों पर न ठीक से विरोध कर पा रहे हैं और न सरकार के साथ ही नजर आ रहे हैं। कुल मिलाकर इस वक्त असमंजस की स्थिति और दोराहे पर खड़े राहुल गांधी ही नजर आ रहे हैं।
PM Modi ने बहुत सतर्कता से किया डेलिगेशन के नामों का चुनाव
सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि ऑल पार्टी डेलिगेशन के लिए सभी पार्टियों के नेताओं के नामों का चयन करते हुए कई पहलू को ध्यान में रखा गया था। इस लिस्ट में से कुछ नामों पर खुद पीएम मोदी की ओर से सुझाव आए थे। हर डेलिगेशन के साथ इस बात का ध्यान रखा गया था कि बतौर सांसद उनकी वक्ता क्षमता क्या है और राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके क्या विचार रहे हैं।
जॉन ब्रिटास और प्रियंका चतुर्वेदी जैसे सांसदों को शामिल करना इसका उदाहरण है। इसके अलावा, सरकार ने उन सांसदों को डेलिगेशन में शामिल करने की कोशिश की है जो भले ही विपक्षी दल के हों, लेकिन राष्ट्रवादी विचारधारा और विदेश नीति जैसे मामलों में दलगत राजनीति से ऊपर रहते हैं। इसका उदाहरण शशि थरूर और गुलाम नबी आजाद जैसे नेता हैं।
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जी-23 गुट के नेताओं को मिली तरजीह
कांग्रेस के जी-23 समूह के कुछ नेताओं ने कुछ साल पहले शीर्ष नेतृत्व को पत्र लिखकर कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली और प्रबंधन पर सवाल उठाए थे। सीधे तौर पर माना जा रहा था कि यह नाराजगी राहुल गांधी और उनके बयानों से है। इसमें गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा, मनीष तिवारी, शशि थरूर जैसे नेता शामिल थे। ऑल पार्टी डेलिगेशन में भी इन सभी सांसदों को शामिल किया गया है।
अब कांग्रेस के लिए मुश्किल स्थिति यह बन गई है कि उनकी अपनी ही पार्टी के कुछ नेता ऑपरेशन सिंदूर और राजनीतिक मतभेदों से परे एकजुटता की बात करते दिख रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी जैसे नेता लगातार सरकार पर हमलावर हैं। बंटे हुए विपक्ष के सामने सरकार एकजुट और मजबूत ही नजर आ रही है।












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