Raghav Chadha joins BJP: 'बीजेपी चला रही ऑपरेशन लोटस', सांसदों के पार्टी छोड़ने पर भड़की AAP
Raghav Chadha joins BJP: आम आदमी पार्टी (AAP) ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर 'ऑपरेशन लोटस' चलाने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि केंद्र सरकार ED और CBI जैसी जांच एजेंसियों का डर दिखाकर उसके सांसदों को तोड़ने की कोशिश कर रही है।
पंजाब के 7 सांसदों के टूटने की खबरों के बीच AAP नेतृत्व ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी धनबल और बाहुबल के दम पर विपक्षी सरकारों को अस्थिर करने का पुराना खेल खेल रही है।

Raghav Chadha Resignation: ऑपरेशन लोटस का नया आरोप
AAP का कहना है कि बीजेपी ने राघव चड्ढा और अन्य माध्यमों से पार्टी में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है। पार्टी के अनुसार, जांच एजेंसियों का डर दिखाकर सांसदों पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि वे पाला बदल लें। AAP ने इसे 'ऑपरेशन लोटस' का हिस्सा बताते हुए कहा कि विपक्षी आवाजों को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह इस दबाव के आगे झुकने वाली नहीं है।
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सांसदों की संभावित टूट और हलचल
खबरों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में AAP के कुछ सांसदों द्वारा राज्यसभा सभापति को पत्र सौंपने की तैयारी थी। इस भनक के लगते ही संजय सिंह और मुख्यमंत्री भगवंत मान सक्रिय हो गए। सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने नाराज नेताओं को मनाने और अरविंद केजरीवाल से मिलवाने की कोशिश की, लेकिन कई सांसदों से संपर्क नहीं हो पाया। सांसदों का अचानक 'लापता' होना और फोन बंद कर लेना पार्टी के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
पार्टी का सख्त रुख: "गद्दारों" को चेतावनी
पार्टी नेतृत्व ने बागी तेवर दिखाने वाले नेताओं को कड़ा संदेश देते हुए उन्हें "गद्दार" तक कह दिया है। AAP का मानना है कि जो नेता निजी स्वार्थ या डर के कारण बीजेपी के साथ जा रहे हैं, उन्हें जनता कभी माफ नहीं करेगी। पार्टी ने साफ कर दिया है कि ऐसे नेताओं के जाने से संगठन की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि पंजाब की जनता सिद्धांतों के साथ खड़ी है और धोखेबाजों को सबक सिखाना जानती है।
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इन सांसदों के पास कोई खास जमीनी आधार नहीं-AAP
पार्टी के भीतर एक राय यह भी है कि जिन सांसदों के जाने की चर्चा है, उनका कोई खास जमीनी आधार नहीं है। AAP का मानना है कि इस टूट का आगामी चुनावों या सरकार की स्थिरता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उल्टा, पार्टी इसे बीजेपी की "दबाव की राजनीति" के खिलाफ एक ढाल बनाकर जनता के बीच सहानुभूति हासिल करेगी। पंजाब की सत्ताधारी पार्टी को भरोसा है कि राज्य का मतदाता इस राजनीतिक दलबदल को सिरे से खारिज कर देगा।












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