रेडियो तरंगें सार्वजनिक संपत्ति, सरकार के एकाधिकार की बात मिथक: जेटली
नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा कि रेडियो तरंगें सार्वजनिक संपत्ति हैं और यह सिर्फ एक मिथक है कि उन पर सरकार का एकाधिकार है, जिसे समाप्त किया जा रहा है। जेटली ने पांचवें राष्ट्रीय सामुदायिक रेडियो सम्मेलन के उद्घाटन पर कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी पर सिर्फ किसी एक प्रसारक का अधिकार नहीं है, बल्कि श्रोताओं का भी इस पर अधिकार है, जिनके पास सूचना का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि सामुदायिक रेडियो के विचार को बढ़ावा देने की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि दो दशक पहले ऐसा सोचा जाता था कि रेडियो तरंगों पर सरकार का एकाधिकार है। उन्होंने कहा, "अब यह मिथक टूट चुका है। रेडियो तरंगें सार्वजनिक संपत्ति हैं।" जेटली ने एक सार-संग्रह जारी किया, जिसमें सामुदायिक रेडियो से जुड़ी प्रेरक कहानियां शामिल हैं।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव बिमल जुल्का ने कहा कि सरकार ने अब तक सामुदायिक रेडियो स्टेशन स्थापित करने से संबंधित 409 मंजूरियां दी हैं, जिनमें से 179 स्टेशन संचालित हो रहे हैं और अन्य कतार में हैं। जुल्का ने कहा, "12वीं पंचवर्षीय योजना की समाप्ति तक 600 सामुदायिक रेडियो स्टेशन खोले जाएंगे।" सामुदायिक रेडियो एक आंदोलन है, जिसका विस्तार हो रहा है। विज्ञान भवन में तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है, जिसमें संचालक, नीति निर्माता, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियां और अन्य घटक हिस्सा ले रहे हैं।












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