लॉकडाउन में कंपनी के पैसे खर्च करने पर मालिक ने मैनेजर को बेरहमी से पीटा, प्राइवेट पार्ट में डाला सैनिटाइजर
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण रोकने के लिए 25 मार्च को लॉकडाउन का ऐलान कर दिया था। इस बीच लाखों लोग दूसरे राज्यों में फंस गए थे। जिसमें पुणे की एक निजी कंपनी का मैनेजर भी शामिल था। लॉकडाउन खुलने के बाद जब वो वापस लौटा, तो कंपनी के मालिक ने उसके साथ ऐसा व्यवहार किया कि उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। अब पीड़ित कर्मचारी ने कंपनी के मालिक समेत तीन लोगों पर एफआईआर करवाई है, हालांकि मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

एक महीने तक रहा लॉज में
दरअसल पुणे स्थित एक फर्म का मैनेजर मार्च में कंपनी के ही काम से दिल्ली गया था। ये फर्म पेंटर्स के लिए प्रदर्शनी आयोजित करती है। इसी दौरान केंद्र सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान कर दिया, जिस वजह से वो दिल्ली में ही फंस गया। इसके बाद उसने एक लॉज में कमरा लिया और वहीं पर किसी तरह दिन गुजारने लगा। जब उसके पैसे खर्च हो गए, तो उसने कंपनी के पैसों का इस्तेमाल किया। लॉकडाउन के तीसरे चरण में केंद्र सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को आने-जाने की छूट दी। जिसके बाद वो 7 मई को वापस पुणे लौटा।

फोन और सामान रखा गिरवी
इसके बाद कंपनी मालिक ने उसे नया फरमान सुनाया और 17 दिन तक एक होटल में क्वारंटाइन रहने को कहा। लॉकडाउन की वजह से उसकी आर्थिक स्थित पहले से ही खराब थी, इस बीच होटल के खर्च ने उसकी मुसीबत और बढ़ा दी। पैसे नहीं होने की वजह से उसे फोन समेत कई सामान पुणे के होटल में गिरवी रखना पड़ा। क्वारंटाइन पूरा करने के बाद जब वो जून में ऑफिस पहुंचा, तो मालिक ने उससे पैसे मांगे। इस पर उसने पैसे खर्च होने की बात बताई।

प्राइवेट पार्ट में डाला सैनिटाइजर
कंपनी के पैसे खुद पर खर्च करना मालिक को बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने 13 जून को अपने दो साथियों के साथ मिलकर उसे अगवा कर लिया। पीड़ित मैनेजर के मुताबिक वो लोग उसे फर्म के ऑफिस ले गए और उसे बेरहमी से पीटा। इस दौरान उन्होंने सारी हदें पार करते हुए उसके प्राइवेट पार्ट पर सैनिटाइजर का स्प्रे छिड़क दिया। किसी तरह वो वहां से छूटकर अस्पताल पहुंचा और अपना इलाज करवाया। जिसके बाद अब उसने थाने में मामले की शिकायत की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।












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