माता-पिता के तलाक से क्या UPSC एस्पिरेंट को मिलता है फायदा? इस दिग्गज ने बताए क्या हैं OBS के नियम
Puja Khedkar Row: ट्रेनी आईएएस ऑफिसर पूजा खेड़कर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब केंद्र सरकार ने पुणे पुलिस को पूजा खेडकर के माता-पिता दिलीप और मनोरमा खेडकर की वैवाहिक स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया है।
पूजा खेडकर पर यूपीएससी परीक्षा में ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर कोटे का गलत इस्तेमाल करने का आरोप है। उन्होंने झूठा दावा किया कि उनके माता-पिता अलग हो गए हैं। अपने मॉक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने दावा किया कि उनके माता-पिता का तलाक हो गया है और वह अपनी मां के साथ रहती हैं।

अब सवाल उठता है कि अगर कोई अभ्यर्थी UPSC की परीक्षा दे रहा है और उसके माता-पिता का तलाक हो चुका है तो उसे इसका क्या और कितना फायदा मिलेगा। साथ ही अगर किसी अभ्यर्थी के माता या पिता या दोनों प्रशासनिक सेवा में हैं तो इसका क्या असर होगा? क्या उन्हें OBC आरक्षण मिलेगा?
क्या कहते हैं यूपीएससी में ओबीसी आरक्षण के नियम?
विवाद को समझने के लिए यूपीएससी परीक्षा में ओबीसी आरक्षण से जुड़े नियमों को जानना जरूरी है। UPSC कोच विकास दिव्यकीर्ति बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति के माता-पिता आईएएस अधिकारी हैं, तो वे ओबीसी आरक्षण के लिए पात्र नहीं हैं, क्योंकि इस पद से जुड़ी आय बहुत अधिक है। नियम के अनुसार, केवल वे ही इस आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं जिनके माता-पिता की वार्षिक आय 8 लाख से कम है, जिसमें कृषि आय शामिल नहीं है।
हालांकि, अगर माता-पिता ग्रुप सी या डी पदों पर हैं और उनकी आय 8 लाख से कम है, तो उम्मीदवार आरक्षण का लाभ उठा सकते हैं। दिव्यकीर्ति ने एक खामी को भी उजागर किया, जहां एक आईएएस अधिकारी इस्तीफा देकर अपनी सारी संपत्ति अपने बच्चे को हस्तांतरित कर सकता है, जिससे बच्चा ओबीसी लाभों का दावा करने में सक्षम हो जाता है क्योंकि आयोग माता-पिता की आय पर विचार करता है, उम्मीदवार की नहीं।
माता-पिता के तलाक का आरक्षण पर प्रभाव
सवाल यह उठता है कि क्या माता-पिता के तलाक से ओबीसी आरक्षण के मामले में उम्मीदवार को लाभ मिलता है। यूपीएससी परीक्षा में तलाक के आधार पर आरक्षण का कोई सीधा प्रावधान नहीं है। हालांकि, अगर माता-पिता अलग हो जाते हैं और उम्मीदवार ऐसी मां के साथ रहता है जिसकी वार्षिक आय 8 लाख से कम है, तो वे ओबीसी गैर-क्रीमी लेयर लाभ के लिए पात्र हो सकते हैं।
पूजा खेडकर के मामले में इस पहलू का लाभ लेने की कोशिश दिख रही है। केंद्र द्वारा पुणे पुलिस से जानकारी मांगने का उद्देश्य इन विवरणों को स्पष्ट करना है। पूरी रिपोर्ट उपलब्ध होने के बाद, इस मामले के बारे में और अधिक जानकारी सामने आएगी। इसके अलावा, पूजा पर अपने विकलांगता प्रमाण पत्र, नाम, पता और अन्य व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित जालसाजी के आरोप हैं। इन आरोपों के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।
यह स्थिति OBC-EWS आरक्षण की जटिलताओं को दिखाती है और इनकी खामियों को उजागर करती है जिनका उम्मीदवार फायदा उठा सकते हैं। इस जांच के नतीजे भविष्य में UPSC परीक्षाओं में ऐसे मामलों को कैसे संभाला जाता है, इस पर व्यापक प्रभाव डाल सकते हैं।












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