मोदी सरकार आने के बाद 322 फीसदी बढ़ा सरकारी बैंकों का एनपीए

मोदी सरकार आने के बाद तीन गुना से ज्यादा बढ़ा सरकारी बैंकों का एनपीएमोदी सरकार में 322 फीसदी बढ़ा सरकारी बैंकों का एनपीए

नई दिल्ली। 30 जून 2014 से दिसंबर 2017 तक पब्लिक सेक्टर के बैंकों का एनपीए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) में तीन गुना से ज्यादा बढ़ा है। ये जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक आरटीआई के जवाब में दी है। आरटीआई इंडिया टुडे की ओर से डाली गई थी। बैंक ने बताया है कि सरकारी बैंकों के एनपीए में 322.21 फीसदी का इजाफा हुआ है।

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आरटीआई में आरबीआई से जून 2014 से जून 2018 तक सरकारी बैंकों के एनपीए की स्थिति को लेकर जानकारी मांगी गई। आरटीआई के जवाब में आरबीआई ने जून 2014 से दिसंबर 2017 तक का आंकड़ा ही मौजूद होने की बात कही। आरबीआई ने सरकारी बैंकों से मिला जून 2014 से दिसंबर 2017 तक का आंकड़ा दिया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक आरबीआई ने बताया है कि 30 जूम 2014 में देश के सरकारी बैंकों का ग्रॉस एनपीए 2,24,542 करोड़ रुपए था। 31 दिसंबर 2017 तक ये एनपीए बढ़कर 7,24, 542 करोड़ पर पहुंच गया। रिजर्व बैंकं ने एक दूसरे सवाल के जवाब में बताया कि अप्रैल 2014 से लेकर मार्च 2018 तक सरकारी बैंकों ने 1,77,931 करोड़ रुपए की रिकवरी की है।

हाल ही में पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़ने के लिए यूपीए और एनडीए दोनों ही सरकारों की नीतियों जिम्मेदार हैं। बैंकों के डूबे कर्ज यानी एनपीए को लेकर राजन के बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस लगातार एक-दूसरे की नीतियों पर सवाल कर रहे हैं।

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