प्राइमरी टीचर्स से ज्‍यादा वेश्‍याएं अपने काम को पूरे लगन से करती हैं: बेसिक शिक्षा अधिकारी

Prostitutes are more professional than Primary teachers
नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। देश के नेता ही नहीं अधिकारी भी कब कौन से शर्मनाक बयान दे दें कुछ नहीं कहा जा सकता। इसका जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में देखने को मिला जहां पूरे प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता जाहिर करते हुए जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) राजेंद्र प्रसाद यादव ने प्राइमरी टीचर्स और वेश्याओं को एक ही तराजू में तौल दिया। बीईओ राजेन्‍द्र यादव के मुताबिक आज टीचर्स से ज्‍यादा वेश्‍याएं अपने काम को पूरी लगन और कर्तव्‍यनिष्‍ठा से करती हैं। सीआरसी (नगर संसाधन केंद्र) प्रेमनगर वार्षिक शैक्षिक समारोह जश्‍न-ए-तालीम-2014 समारोह में उन्होंने ये बात कही।

इस समारोह का थीम तालीम-तरबियत-तहजीब रखी गई थी। राजेन्‍द्र यादव यहां मुख्‍य अतिथि के रूप में आए थे। चौकाने वाली बात ये है कि इस कार्यक्रम के दौरान करीब 20 महिला टीचर्स को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उनके सेवानिवृत्‍त होने पर उन्‍हें सम्‍मानित किया और उसी संबोधन में ऐसी शर्मनाक बयान दे डाले। जानकारी के मुताबिक मंच पर माइक संभालते ही कानपुर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी राजेंद्र प्रसाद यादव ने हॉल में बैठे प्राइमरी स्‍कूल के टीचरों की ओर मुखातिब होते हुए कहा कि ‘मन के हारे हार है, मन के जीते जीत'।

उसके बाद बीईओ ने जो कहा, उससे हॉल में खामोशी छा गई। दरअसल बीईओ ने जिला सहित प्रदेश में प्राइमरी स्कूलों में गिरते शिक्षा के स्तर पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि एक वेश्या भी अपने काम को समझ लेती है कि वेश्यावृति हमारे भाग्य में लिखा है, तो उसको भी बड़े ईमानदारी से सत्यनिष्ठा से करती है। मगर हमारे टीचरों को जो ड्यूटी दी गई है, उसे पूरा करना तो दूर उन्हें छोटे बच्चों को पढ़ाने में शर्म आती है, तमाम टीचर इसको अपनी तौहीन समझते हैं, अपना अपमान समझते हैं और पढ़ाने से कतराते हैं। जो आज के समय की सबसे बड़ी कमी है।

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