लोकसभा चुनाव 2019- उजियारपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: बिहार की उजियारपुर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय हैं। साल 2014 के चुनाव में उन्होंने ये सीट आरजेडी के दिग्गज आलोक कुमार मेहता को हराकर हासिल की थी। साल 2014 के चुनाव में उजियारपुर सीट पर नंबर 2 पर आरजेडी, नंबर 3 पर जेडीयू और नंबर 4 पर सीपीएम थी। उस साल यहां मतदाताओं कीं संख्या 14 लाख 28 हजार 445 थी, जिसमें से 8 लाख 58 हजार 920 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिनमें पुरुषों की संख्या 4 लाख 33 हजार 926 थी तो वहीं महिलाओं की संख्या 4 लाख 24 हजार 994 थी।

profile of Ujiarpur lok sabha constituency

उजियारपुर लोकसभा सीट का इतिहास

आपको बता दें कि नए परिसीमन पर उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र बना था। इस निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं। दरअसल उजियारपुर पहले समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत ही आता था लेकिन वर्ष 2009 में नए परिसीमन में इसे लोकसभा क्षेत्र बनाया गया, जो कि रोसड़ा संसदीय क्षेत्र के ख़त्म होने से कारण अस्तित्व में आया , उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में वैशाली जिले के पातेपुर को भी शामिल किया गया है।

साल 2009 के चुनाव में यहां पर पहली बार जदयू से अश्वमेघ देवी सांसद बनीं,इस चुनाव में अश्वमेघ देवी ने राजद के आलोक मेहता को 25,274 मतों से पराजित किया था लेकिन साल 2014 के चुनाव में यहां भाजपा ने बाजी मार ली और नित्यानंद राय यहां के सरताज बने, नित्यानंद इससे पहले हाजीपुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। साल 2000 से 2010 के बीच वो लगातार चार बार विधायक चुने गए। 2014 में उन्हें लोकसभा का टिकट मिला और उसमें भी विजयी रहे, जिसके बाद उन्हें पुरस्कार स्वरूप प्रदेश पार्टी की कमान सौंप दी गई।

नित्यानंद का लोकसभा में प्रदर्शन

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान 53 वर्षीय नित्यानंद की लोकसभा में उपस्थिति 70 प्रतिशत रही है तो वहीं इस दौरान उन्होंने सदन की 7 डिबेट में हिस्सा लिया और 141 प्रश्न पूछे हैं। नित्यानंद संसद में कृषि मामलों की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य भी हैं।

उजियारपुर लोकसभा क्षेत्र में यादव और कुशवाहा ही जीत-हार की दिशा तय करते हैं लिहाजा जेडीयू ने जहां अपने निवर्तमान सांसद अश्वमेघ देवी जो कि कुशवाहा जाति से आती हैं,उन्हें मैदान में उतारा था तो वहीं राजद ने पूर्व सांसद आलोक मेहता को प्रत्याशी बनाया जो कि राजद में कुशवाहा जाति के बड़े चेहरे माने जाते हैं तो वहीं माकपा ने पूर्व विधायक रामदेव वर्मा को मैदान में उतारा जो कि कुशवाहा जाति से ही आते हैं। तीन-तीन कुशवाहा जाति के नेताओं के मैदान में आने से कुशवाहा वोट के बंटने के संकेत पहले से ही मिलने लगे थे इसी का फायदा नित्यानंद राय ने उठाया। नित्यानंद राय यादव जाति से आते हैं और उजियारपुर में कुशवाहा के बराबर यादव जाति का वोट है इसलिए उन्होंने स्वजातीय वोट को अपने पक्ष में मोड़ा और ब्राह्मणों के वोट को समेटकर जीत हासिल की, गौरतलब है कि उजियारपुर में ब्राह्मण और मुस्लिम का वोट लगभग बराबर है।

लेकिन इस बार समीकरण थोड़े से यहां बदले हुए हैं, अब एनडीए के साथ जेडीयू है, ऐसे में यहां की लड़ाई थोड़ी सी से रोचक हो गई है, विकास की गति इस इलाके में अभी भी काफी पीछे है, ऐसे में यहां की सीट पर भाजपा की वापसी इस बात पर निर्भर करेगी कि नित्यानंद राय और भाजपा के कामों से कितना यहां की जनता संतुष्ट है, इस वापसी में सीएम नीतीश कुमार फैक्टर भी शामिल होगा, जिनकी सरकार इस वक्त राज्य में हैं और उन्होंने भी विकास के ही नाम पर जनता से वोट मांगे हैं। देखना दिलचस्प होगा कि इस बार की जनता क्या वाकई में इस बार विकास के आधार पर अपना नेता चुनती है या एक बार फिर, यहां के जातीय समीकरण ही इस सीट के सांसद की ताजपोशी तय करेंगे।

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