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लोकसभा चुनाव 2019: सतना लोकसभा सीट के बारे में जानिए

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नई दिल्ली: मध्यप्रदेश की सतना लोकसभा सीट से भाजपा के गणेश सिंह सांसद हैं, यहां लंबे वक्त से भाजपा का राज है, इस सीट पर आखिरी बार 1991 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह संसद पहुंचे थे। सतना जिला ऐतिहासिक रूप से बघेलखंड क्षेत्र में आता है। इस पर रीवा राजघराने का शासन था।बौद्ध धर्म की किताब और महाभारत में भी इसका उल्लेख है।इस संसदीय क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें हैं। साल 1967 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां जीत दर्ज की थी, उसके बाद साल 1971 में भारतीय जन संघ और 1977 में ये सीट भारतीय लोकदल ने जीती थी, साल 1980 और 1984 में यहां कांग्रेस का राज रहा, साल 1989 के चुनाव में पहली बार यहां भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी, 1991 के चुनाव में यहां अर्जुन सिंह विजयी हुए थे और उसके बाद यहां पर कांग्रेस जीत के लिए तरस गई है।

profile of Satna lok sabha constituency

साल 1996 के चुनाव में बसपा ने पहली बार यहां विजय हासिल की थी इसके बाद साल 1998 में यहां भाजपा की वापसी हुई और तब से लेकर अब तक केवल यहां भाजपा का ही राज है। बीजेपी के रामानंद सिंह यहां पर दो बार सांसद रहे तो वहीं साल 2004 से यहां भाजपा के कद्दावर नेता गणेश सिंह सांसद हैं।

गणेश सिंह का लोकसभा में प्रदर्शन

दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में उनकी उपस्थिति 87 प्रतिशत रही और इस दौरान उन्होंने 145 डिबेट में हिस्सा लिया और 346 प्रश्न पूछे। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस, नंबर 3 पर बसपा और नंबर 4 पर IND थी। साल 2014 के चुनाव में यहां कुल वोटरों की संख्या 1702,794 थी, जिसमें से केवल 8,74,477 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 5,17,341 और महिलाओं की संख्या 3,57,136 थी।

सतना की कुल आबादी 25,87,685 है, जिनमें से 81 प्रतिशत लोग गांवों में और 18 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। सतना में ठाकुर वोटों का बोलबाला है , जिसका फायदा गणेश सिंह लंबे वक्त से उठाते आ रहे हैं लेकिन क्या ये फायदा इस बार भी भाजपा को मिलेगा, ये एक बड़ा सवाल है। साथ ही यहां एक बात गौर करने वाली है कि इस जगह ब्राह्मण वोट भी बहुतायत में है और उन्हीं वोटों को अपनी ओर करने का प्रयास कांग्रेस ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में किया था और इसी वजह से मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस यहां मात्र सात हजार वोटों से हारी थी, बताते चलें कि इसलिए लंबे वक्त से यहां पर कांग्रेस ब्राह्मण, आदिवासी, ठाकुर (बेट) के गठजोड़ पर काम करने में लगी हुई है जिसका फायदा उसे मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में मिला है लेकिन उसकी ये गणित क्या सतना लोकसभा सीट पर इस बार सफल होगी और उसका वनवास यहां पर खत्म होगा, ये एक बड़ा सवाल है।

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English summary
profile of Satna lok sabha constituency
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