लोकसभा चुनाव 2019- समस्तीपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: बिहार की समस्तीपुर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद लोजपा के रामचन्द्र पासवान हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस के डॉ अशोक कुमार को 6872 मतों से हराया था। इसी के साथ रामचन्द्र पासवान ने पिछले पांच सालों से समस्तीपुर सीट पर अपना एकाधिकार रखा है। 2014 के आम चुनाव में समस्तीपुर लोकसभा सीट पर कुल 57 प्रतिशत मतदान हुआ जिसमें 4,30,736 पुरुष एवं 4,32,463 महिला मतदाता थे।

समस्तीपुर लोकसभा सीट का इतिहास
समस्तीपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत 6 विधानसभा खंड हैं। इनके नाम कुशेश्वर स्थान, हायाघाट, कल्यानपुर, वारिसनगर, समस्तीपुर और रोसेरा हैं। साल 1952 से इंडियन नेशनल कांग्रेस के सत्य नारायण सिन्हा से लेकर 2014 में लोक जनशक्ति पार्टी के राम चन्द्र पासवान तक समस्तीपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र ने कई रजनैतिक रंग देखे हैं| अन्य पांच विधानसभा सीटों में से कुशेश्वर स्थान और हायाघाट दरभंगा डिस्ट्रिक्ट में आते हैं। बिहार के 38 जिलों में से एक समस्तीपुर जिला आबादी के नजर से भारत का 42वां सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला है। इस जिले में तमाम लघु उद्योग चलते हैं। समस्तीपुर में ही पूर्वी केन्द्रीय रेलवे का सब डिवीज़न भी है।
1980 के चुनावों से लेकर अबतक यहाँ पर अधिकतम विजय प्रतिशत जनता दल 71 प्रतिशत के साथ का रहा है जबकि दुसरे स्थान पर राष्ट्रिय जनता दल रही है। जनसख्या को मद्देनज़र रख कर देखें तो यहाँ की 95.08 प्रतिशत जनता ग्रामीण इलाकों से ताल्लुक रखती है जबकि मात्र 4.92 प्रतिशत जनता ही शहरी है। इनमे 19.47 प्रतिशत एस सी एवं 0.08 प्रतिशत एस टी हैं। यानी कि यहां पर किसी भी पार्टी के लिये पिछड़ी जातियों को ढाल बनाना लगभग नामुमकिन है। लेकिन हां इसमें कोई दो राय नहीं कि समस्तीपुर का भविष्य किसानों के हाथ में है।
रामचन्द्र पासवान का लोकसभा में प्रदर्शन
रामचन्द्र पासवान ने दिसम्बर 2018 तक लोकसभा में मात्र 3 प्रश्न पूछे। उसी तरह से डिबेट का राष्ट्रीय औसत 63.8 है। पासवान ने सदन में मात्र 3 चर्चाओं में हिस्सा लिया। इन्होने लोकसभा में अपनी उपस्थिति भरपूर दर्ज करायी है। उपस्थिति के तौर पर जहाँ राज्य का औसत 88 प्रतिशत है वहीँ दिसम्बर 2018 तक इनकी व्यक्तिगत उपस्थिति 80 प्रतिशत रही है। पर बीते पांच वर्षों में इन्होने कोई भी प्राइवेट मेम्बर बिल नहीं प्रस्तुत किया है।
2014 के आम चुनाव के आंकड़ों पर नज़र डालें तो किसी भी पार्टी का वोटबैंक मजबूत नहीं कहा जा सकता है। 2014 के लोकसभा चुनावों में विजयी पार्टी लोजपा का वोट शेयर मात्र 31 प्रतिशत रहा, जबकि दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस पार्टी का वोट शेयर 30 प्रतिशत था। 2019 में लोजपा का वोट बैंक मजबूत हुआ या कमजोर पड़ा यह तो पासवान के जमीनी काम-काज पर निर्भर करेगा, वहीं कांग्रेस या अन्य पार्टी मजबूत प्रदर्शन कर पायेगी यह उनके प्रचार पर निर्भर करेगा। खैर 2019 के परिणाम आने पर ही पता चलेगा कि यहां के असली वोटर यानी किसान किसे चुनते हैं।












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