लोकसभा चुनाव 2019: संभल लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की उत्तर प्रदेश की संभल लोकसभा सीट पर इस वक्त भाजपा का कब्जा है। 2014 के चुनाव में में यहां पर बीजेपी के सत्यपाल सिंह सैनी ने सपा प्रत्याशी डा. शफीकुर्रहमान बर्क को हराया था। सत्यपाल सिंह और शफीकुर्रहमान बर्क के बीच अंतर महज 5174 वोटों का अंतर रहा था। 2014 के चुनाव में सपा दूसरे और बसपा तीसरे नंबर पर रही थी।

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की उत्तर प्रदेश की संभल लोकसभा सीट पर इस वक्त भाजपा का कब्जा है। 2014 के चुनाव में में यहां पर बीजेपी के सत्यपाल सिंह सैनी ने सपा प्रत्याशी डा. शफीकुर्रहमान बर्क को हराया था। सत्यपाल सिंह और शफीकुर्रहमान बर्क के बीच अंतर महज 5174 वोटों का अंतर रहा था। 2014 के चुनाव में सपा दूसरे और बसपा तीसरे नंबर पर रही थी। संभल के वर्तमान सांसद सत्यपाल सिंह की पिछली पांच सालों में लोकसभा में उपस्थिति 96 प्रतिशत रही है। उन्होंने 103 डिबेट में हिस्सा लिया और 23 सवाल पूछे। संभल लोकसभा क्षेत्र मुरादाबाद से अलग हुआ जिला है। संभल लोकसभा पर पहली बार 1977 में अस्तित्व में आई थी। संभल में पहली बार 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय लोक दल की शांति देवी ने विजय प्राप्त की। 1989 से लेकर 1996 तक जनता दल के श्रीपाल सिंह यादव लगातार यहां 2 बार सांसद चुने गए थे, 1996 में श्रीपाल सिंह यादव को बहुजन समाज पार्टी के धर्मपाल यादव ने हराया। समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव 1998 में यहां से सांसद बने। मुलायम सिंह यादव 2 बार संभल से सांसद रह चुके हैं। 2004 में समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव यहां से सांसद बने। 2009 में यह सीट बहुजन समाज पार्टी के डा. शफीकुर्रहमान बर्क यहां से एमपी चुने गए। साल 2014 में वो सपा के टिकट पर लड़े लेकिन भाजपा प्रत्याशी से हार गए। शिल्पकारों की धरती कहे जाने वाले संभल की 52 प्रतिशत आबादी हिंदू और 47 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है, साल 2014 के चुनाव में 1693229 वोटरों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 55 प्रतिशत पुरुष और 44 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। अपनी शिल्पकला क लिए मशहूर संभल का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। लोधियों से लेकर मुग़लों तक ने संभल पर राज किया है और यह सम्राट अशोक के साम्राज्य का भी हिस्सा रह चुका है।

संभल के वर्तमान सांसद सत्यपाल सिंह की पिछली पांच सालों में लोकसभा में उपस्थिति 96 प्रतिशत रही है। उन्होंने 103 डिबेट में हिस्सा लिया और 23 सवाल पूछे।

संभल लोकसभा क्षेत्र मुरादाबाद से अलग हुआ जिला है। संभल लोकसभा पर पहली बार 1977 में अस्तित्व में आई थी। संभल में पहली बार 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय लोक दल की शांति देवी ने विजय प्राप्त की। 1989 से लेकर 1996 तक जनता दल के श्रीपाल सिंह यादव लगातार यहां 2 बार सांसद चुने गए थे, 1996 में श्रीपाल सिंह यादव को बहुजन समाज पार्टी के धर्मपाल यादव ने हराया।

समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव 1998 में यहां से सांसद बने। मुलायम सिंह यादव 2 बार संभल से सांसद रह चुके हैं। 2004 में समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव यहां से सांसद बने। 2009 में यह सीट बहुजन समाज पार्टी के डा. शफीकुर्रहमान बर्क यहां से एमपी चुने गए। साल 2014 में वो सपा के टिकट पर लड़े लेकिन भाजपा प्रत्याशी से हार गए।

शिल्पकारों की धरती कहे जाने वाले संभल की 52 प्रतिशत आबादी हिंदू और 47 प्रतिशत जनसंख्या मुस्लिम है, साल 2014 के चुनाव में 1693229 वोटरों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 55 प्रतिशत पुरुष और 44 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। अपनी शिल्पकला क लिए मशहूर संभल का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। लोधियों से लेकर मुग़लों तक ने संभल पर राज किया है और यह सम्राट अशोक के साम्राज्य का भी हिस्सा रह चुका है।

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