लोकसभा चुनाव 2019: नांदेड़ लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: महाराष्ट्र के नांदेड़ लोकसभा सीट से महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष और पूर्व सीएम अशोक चव्हाण सांसद हैं। उन्होंने साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा नेता डीबी पाटिल को 81, 455 वोटों के अंतर से हराया था। अशोक चव्हाण को इस चुनाव में 49,30, 75 वोट मिले थे तो वहीं डीबी पाटिल को 41,16,20 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। मोदी लहर के बीच अशोक चव्हाण की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी से कम नहीं थी। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर भाजपा और नंबर 3 पर BMUP थी, उस साल यहां कुल मतदाताओं की संख्या 16,87,057 थी, जिसमें से मात्र 10,13,350 लोगों ने अपने मत का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 5,49,945 और महिलाओं की संख्या 4,63,405 थी।

profile of Nanded lok sabha constituency

नांदेड़ लोकसभा सीट का इतिहास
इस संसदीय क्षेत्र में 6 विधानसभा सीटें आती हैं, आंकड़ों पर गौर करें तो आजादी के बाद से अबतक नांदेड़ लोकसभा सीट के लिए 19 बार चुनाव हुए है, इसमें से 15 बार कांग्रेस ही यहां विजयी रही है, साल 1957 से लेकर 1971 तक यहां पर कांग्रेस का छत्र राज रहा है, साल 1977 के चुनाव में यहां पर जनता पार्टी जीती थी लेकिन 1980 में यहां पर कांग्रेस की वापसी हुई और तब से लेकर 1999 तक यहां पर कांग्रेस की शासन रहा। 1980 और 1984 में अशोक चव्हाण के पिता शंकरराव चव्हाण यहां से जीते थे तो वहीं 1987 के उप चुनाव में अशोक चव्हाण पहली बार इस सीट से चुनाव जीत कर संसद पहुंचे थे। हालांकि 1989 के चुनाव में यहां जनता दल को जीत मिली थी लेकिन इसके बाद फिर से यहां के सांसद की कुर्सी पर कांग्रेस का ही राज रहा, साल 2004 में पहली बार यहां पर कमल खिला और डीबी पाटिल यहां से सांसद चुने गए लेकिन साल 2009 के चुनाव में यह सीट फिर से कांग्रेस के ही हाथ में चली गई और तब से लेकर अब तक उसी का राज यहां पर विद्यमान है।
नांदेड़ , परिचय-प्रमुख बातें-
गोदावरी नदी के तट पर बसा नांदेड़ महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में से एक है। नंदा तट के कारण इस शहर का नाम नांदेड़ पड़ा। सातवीं शताब्दी ईसा पूर्व में नंदा तट मगध साम्राज्य की सीमा थी। प्राचीन काल में यहां सातवाहन और देवगिरी के यादवों का शासन था तो मध्यकाल में बहमनी, निजामशाही, मुगल और मराठों ने यहां शासन किया जबकि आधुनिक काल में यहां हैदराबाद के निजामों और अंग्रेजों का अधिकार रहा है, सिख तीर्थस्थल के रूप में यह शहर काफी चर्चित है। नांदेड़ स्थित सचखंड गुरूद्वारा यहां आस्था का केंद्र है, बहुत सारी सांस्कृतिक विरासत को अपने अंदर समेटे इस शहर की आबादी 22,87,079 है, जिसमें से 65 प्रतिशत लोग गांवों में तो 34 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं।

लंबे समय तक अशोक चव्हाण दिल्ली की राजनीति छोड़ महाराष्ट्र की राजनीति में व्यस्त रहे और राज्य के मुख्यमंत्री की कुर्सी भी संभाली लेकिन साल 2014 का चुनाव जीतकर वो यहां से संसद पहुंचे। दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों में उनकी लोकसभा में उपस्थिति 43 प्रतिशत रही और इस दौरान उन्होंने मात्र 9 डिबेट में हिस्सा लिया और 829 प्रश्न पूछे हैं। नांदेड़ लोकसभा सीट कांग्रेस पार्टी का गढ़ है और इस सीट पर दलित वोटर और मराठी वोटर दोनों ही निर्णायक वोटरों का काम करते हैं तो वहीं मुस्लिम मतदाता भी यहां के चुनाव में अहम रोल निभाते हैं, हालांकि कांग्रेस को भी यहां एक बार बीजेपी से झटका लग चुका है, देखते हैं इस बार यहां की जनता अपने पुराने साथी को ही चुनती है या फिर कुछ चौंकाने वाले परिणाम से हमें रूबरू कराती है, फिलहाल इस सीट की जंग रोचक होगी, ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

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