लोकसभा चुनाव 2019: कोप्पल लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली। कर्नाटक के कोप्पल लोकसभा सीट में पूरा कोप्पल जिला और बेल्लरी और रायचूर के कुछ क्षेत्र आते हैं। 2009 में इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का खाता खुला और इसके बाद से लगातार दो बार भाजपा यहां से चुनाव जीत रही है। इस समय यहां से भाजपा के कराड़ी संगन्ना अमरप्पा सांसद हैं, जिन्होंने 2014 में कांग्रेस के बसावराज हिंटल को 32,414 वोटों से हराया था। 2014 में यहां कांग्रेस और जेडीएस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। अब दोनों पार्टियों की राज्य में गठबंधन में सरकार है। ऐसे में लोकसभा में भी अगर दोनों साथ लड़े तो मदिरों के लिए दुनियाभर में मशहूर कोप्पल जिले की इस सीट पर चुनाव में एक दिलचस्प मुकाबला पर देखने को मिल सकता है।

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63 साल के कराड़ी संगन्ना की लोकसभा में उपस्थिति 81 फीसदी रही है। उन्होंने 35 डिबेट में हिस्सा लिया और 148 सवाल पूछे। कोप्पल की आबादी 21,87,977 है। जिसमें 82.25 प्रतिशत लोग गावों और 17.75 फीसदी शहरों में रहते हैं। यहां एससी समुदाय 19 फीसदी और एसटी की आबादी 13 प्रतिशत है। कोप्पल सीट पर 15,35,105 मतदाता पंजीकृत हैं। 2014 में यहां 10,06,508 लोगों ने अपना वोट डाला था।

कोप्पल संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभाए सीटें हैं, जिसमें दो सीटें एसटी और एक एससी कैंडिडेट के लिए सुरक्षित है। कोप्पल में 1951 में निर्दलीय शिवमूर्ति स्वामी और 1957 में कांग्रेस के सनगप्पा अंडानप्पा ने चुनाव जीता। 1962 में हुए आम चुनाव में लोकसेवक संघ के शिवमुर्ति स्वामी को जीत हासिल हुई। इसके बाद हुए 12 आम चुनावों में कांग्रेस ने नौ बार इस सीट पर कब्जा जमाया। 1989 और 1996 में बासवराज पाटिल ने जनता दल के बैनर के तले यहां से चुनाव जीता। 2009 में बीजेपी के शिवरामगौड़ा ने यहां से जीत हासिल की। 2014 में भाजपा के कराड़ी संगन्ना जीते। यहां से कांग्रेस के एच.जी. रमालू ने चार बार इलेक्शन जीता है। वो 1980, 84, 98 और 99 में सांसद चुने गए।

कोप्पल बैंग्लोर से 300 किमी दूर है। कोप्पल में लंबे समय तक होयसाल और फिर चालुक्यों का शासन रहा है। बाद में काफी वक्त तक ये हैदराबाद के निजाम के अधीन रहा है। लुये पत्थर से बने मन्दिर कोप्पल की खास पहचान हैं। शहर के मन्दिरों का धार्मिक के साथ-साथ इसकी स्थापत्य कला का भी महत्व है। इस छोटे से शहर में साल भर पर्यटक यहा के शानदार अतीत की देखने के लिये आते हैं। यहां इसके अलावा यहां के प्रसिद्ध मंदिरों में अमृतेश्वर मंदिर, काशी विश्वेश्वर मंदिर और डोड्डा बपस्सा मंदिर शामिल हैं।

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