लोकसभा चुनाव 2019: कांगड़ा लोकसभा सीट के बारे में जानिए

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    Lok Sabha Election 2019: History of Kangra, MP Performance card | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा लोकसभा सीट पर इस वक्त भारतीय जनता पार्टी के नेता शांता कुमार सांसद हैं। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के चंदर कुमार को 1,70,072 मतों से हराकर यह सीट अपने नाम की थी। कांगड़ा लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 1) में कुल मतदाताओं की संख्या 12,58,601 है। इनमें से 6,45,888 मतदाता पुरुष हैं और 6,12,713 महिलाएं हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में 7,99,445 लोगों मतदान किया था। इनमें 3,92,927 मतदाता पुरुष और 4,06,518मतदाता महिलाएं थीं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 64 फीसदी मतदान हुआ था। 1967 से 2014 के बीच यहां पर इस सीट पर 6 बार कांग्रेस और 6 बार बीजेपी जीती है।

    profile of Kangra lok sabha constituency

    राजनीतिक घटनाक्रम:

    अगर बात कांगड़ा लोकसभा सीट के राजनीतिक घटनाक्रम की करें तो इस सीट पर आजादी के बाद 1951 से लेकर 1971 तक कांग्रेस का का कब्जा रहा। 1951 में इस सीट पर हुए पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के हेम राज सांसद चुने गए थे। हेमराज इस सीट से 1951, 1957, 1962 और 1967 में चार बार चुनाव जीते। 1957 में इस सीट से कांग्रेस की टिकट पर दलजीत सिंह ने चुनाव लड़ा और सांसद बने। 1977 में बीएलडी पार्टी के दुर्गा चंद इस लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 1980 में कांग्रेस ने इस सीट पर फिर से कब्जा जमाया। 1984 में इस सीट के कांग्रेस की चंदेश्वरी कुमारी पहली महिला सांसद चुनी गईं। 1989 में इस सीट पर पहली बार बीजेपी जीती और सांसद बने शांता कुमार। 1991 में बीजेपी के डीडी खनोरिया यहां के सांसद बने। लेकिन 1996 में कांग्रेस के सत महाजन सांसद बने। 1998 और 1999 मे इस सीट से एक बार फिर शांता कुमार सांसद बने। 2004 में कांग्रेस के चंदर कुमार ने इस सीट पर कब्जा जमाया। 2009 में इस सीट से बीजेपी के राजन सुशांत सांसद बने। 2014 में बीजेपी ने एक बार फिर शांता कुमार को मैदान में उतारा। इस बार भी वे इस सीट को जीतने में सफल रहे।

    मौजूदा सांसद के बारे में:
    कांगड़ा सीट से चार बार सांसद रहे शांता कुमार ने वर्ष 1989 में सबसे पहले सांसद बने थे। इसके अलावा, वह एक बार राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। वहीं, हिमाचल के मुख्यंत्री भी रहे हैं। वर्ष 1999 में शांता कुमार वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे हैं। शांता कुमार भाजपा के दिग्गज नेताओं में आते हैं। 2019 में परंपरागत लोकसभा सीट कांगड़ा से शांता कुमार के चुनाव लड़ने से इंकार के बाद अब भाजपा को अब यहां से एक नए चेहरे की तलाश है। अगर हम उनके पांच साल के कार्यकाल पर नजर डालें तो उन्होंने पांच साल में लोकसभा में 13 प्रश्न पूछे, जबकि उन्होंने किसी भी डिबेट में हिस्सा नहीं लिया। वहीं अगर उनकी लोकसभा में उपस्थिति की बात करें तो वे मई 2014 से दिसंबर 2018 के बीच उनकी उपस्थिति 90 फीसदी रही।

    कांगड़ा एक परिचय: प्रमुख बातें

    • हिमालय की कांगड़ा घाटी में बसा यह शहर हिमाचल के प्रमुख शहरों में एक है। यह नगर बाणगंगा तथा माँझी नदियों के बीच बसा हुआ है।
    • कांगड़ा जिले का मुख्यालय धर्मशाला है। कांगड़ा को पुराने समय मे त्रिगर्त नाम से जाना जाता था।
    • 1864 से 1 नवंबर 1966 तक कांगड़ा पंजाब का हिस्सा था। 1 नवंबर 1966 को कांगड़ा हिमाचल प्रदेश में मिलाया गया।
    • 1 सितंबर 1972 को कांगड़ा जिला अपने पूर्ण स्वरूप में आया। यहाँ पर देवीमंदिर के दर्शन के लिए हजारों यात्री प्रति वर्ष आते हैं।
    • यह शहर कई प्रसिद्ध मंदिरों, झीलों और पर्यटक स्थलों के लिए देश भर में प्रसिद्ध है।

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