लोकसभा चुनाव 2019: हाथरस लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की हाथरस लोकसभा सीट पर इस वक्त भाजपा का कब्जा है। साल 2014 में यहां पर बीजेपी के राजेश दिवाकर ने बसपा के मनोज कुमार को 326386 वोटों से हराकर ये सीट हासिल की थी। 2014 के चुनाव में इस सीट पर BSP दूसरे, SP तीसरे , RLD चौथे और AAP 5वें नंबर पर रही थी। उस चुनाव में यहां पर 1758927 मतदाताओं ने हिस्सा लिया था, जिनमें 55 प्रतिशत पुरूष और 44 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं। बीजेपी और बीएसपी के बीच मात्र 31.11 प्रतिशत वोटों का अंतर था।

1962 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुए थे, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नारदेओ स्नातक विजयी हुए थे, वो इससे पहले अलीगढ़ में भी 2 बार सांसद रह चुके थे, 1967 में भी ये सीट स्नातक को ही मिली, इसके बाद 1971 में भी ये सीट कांग्रेस के ही पास रही लेकिन 1977 में यहां राष्ट्रीय लोकदल ने कब्जा कर लिया और इसके बाद 1980 में यहां से जनता पार्टी ( सेक्यूलर) जीती थी, हालांकि साल 1984 में यहां कांग्रेस की वापसी हुई लेकिन 1991 में उसे जनता दल के हाथों हार का मुंह देखना पड़ा। साल 1991 में पहली बार इस शहर में भारतीय जनता पार्टी का प्रवेश हुआ और लाल बहादुर रावल यहां से सांसद बने, इसके बाद कई सालों तक ये सीट भाजपा के पास ही रही और रावल के बाद किशन लाल दिलेर भाजपा से 4 बार लगातार हाथरस से एमपी चुने गए, 2009 में भाजपा के हाथों से ये कुर्सी छिन गयी और राष्ट्रीय लोकदल की सारिका बघेल यहां की सांसद बन बैठी लेकिन 2014 में एक बार फिर से सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा के राजेश दिवाकर भरी मतों से विजयी हुए और यहां भगवा झंडा फहराया।
मौजूदा सांसद के बारे में:
जमीनी नेता कहे जाने वाले राजेश दिवाकर भाजपा के वरिष्ठ और साफसुथरी छवि वाले नेता कहे जाते हैं, अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान उनकी लोकसभा में उपस्थिति 99 प्रतिशत रही है, जिसमें इन्होंने केवल मात्र 7 डिबेट में हिस्सा लिया है और केवल 260 सवाल सदन में पूछे हैं, जो कि निश्चित तौर पर एक अच्छा आंकड़ा नहीं है, उनकी सांसद निधि का 9o प्रतिशत हिस्सा तो यहां के कार्यों में खर्च हुआ है लेकिन उन सभी कार्याों से यहां की जनता संतुष्ट है या नहीं, ये तो चुनावी नतीजे बताएंगे।
हाथरस एक परिचय: प्रमुख बातें
- राज्य के प्राचीन शहरों में गिना जाने वाला हाथरस ,अलीगढ़ डिवीज़न का ही हिस्सा है।
- इसका इतिहास महाभारत और हिन्दू धर्मकथाओं से जुड़ा हुआ है और यहां ब्रजभाषा बोली जाती है।
- ये एक ऐसा स्थान है जहां परजाट, कुषाण, गुप्ता और मराठा सबका शासन रहा है।
- यहां भगवान बलराम का मंदिर है, जिसके लिए यह पूरे देश में जाना जाता है। यहां हर साल 'दाऊ मेल' लगता है जिसे देखने के लिए विदेशी सैलानी भी यहां आते हैं।
- हाथरस हींग, घी, होली के रंग और कपास उत्पादन के लिए मशहूर है।
- यहां का क्षेत्रफल 1,840 वर्ग किलोमीटर है और यहां की जनसंख्या 1,565,678 है, जिसमें से 52% पुरुष और 48% महिलाएं हैं।
- हाथरस में 5 विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनके नाम छर्रा, इगलास, हाथरस, सादाबाद और सिंकंद्र राव है, जिनमें से इगलास और हाथरस अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।












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