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लोकसभा चुनाव 2019- मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: बिहार की मुजफ्फरपुर लोकसभा की सीट से सांसद अजय निषाद हैं। साल 2014 में पहली बार मुजफ्फरपुर में बीजेपी का खाता अजय निषाद ने ही खोला, मगर, इसका श्रेय दिसम्बर 2018 में दिवंगत हुए समाजवादी नेता कैप्टन जयनारायण निषाद को जाता है जिन्होंने अपने बेटे के लिए इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा।

profile of Muzaffarpur lok sabha constituency

मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट का इतिहास

मुजफ्फरपुर से जयनारायण निषाद 4 बार लोकसभा के सदस्य रहे। समय-समय पर वे दल बदलते रहे। कभी आरजेडी तो कभी जेडीयू। अगर 2004 को छोड़ दें तो कैप्टन निषाद 1998 से लगातार मुजफ्फरपुर से सांसद चुने जाते रहे। 2004 में यहां से जॉर्ज फर्नांडीज़ ने जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। मुजफ्फरपुर सीट की पहचान जॉर्ज फर्नांडीज़ से भी जुड़ी रही है। जॉर्ज ने जनता पार्टी के टिकट पर 1977 और 1980 में इसी सीट से लोकसभा तक का सफर तय किया। जॉर्ज फर्नांडीज़ 1989 और 1991 में जनता दल के टिकट पर सांसद चुने गये।मुजफ्फरपुर की सीट पर 1984 के बाद से कभी कांग्रेस जीत दर्ज नहीं कर सकी है। बीजेपी का भी पहली बार यहां से खाता खुला है। बीजेपी उम्मीदवार अजय निषाद ने कांग्रेस उम्मीदवार को 2 लाख 22 हज़ार से ज्यादा वोटों से हराया। जेडीयू तीसरे नम्बर पर रहा।

अजय निषाद का लोकसभा में प्रदर्शन

संसद में 19 बार अजय निषाद ने बहस में हिस्सा लिया और 217 सवाल पूछे। कोल एंड स्टील और पब्लिक अंडरटेंकिंग कमेटियों के वे सदस्य भी हैं। सांसद निधि के नजरिए से देखें तो अजय निषाद का अच्छा प्रदर्शन रहा है। दिसम्बर तक के आंकड़े के अनुसार 20 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके थे और इनमें से 2.5 करोड़ की राशि बची हुई है। 5 महीने का समय भी बाकी है।

मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें हैं। इनमें आरजेडी के पास 3 सीटें हैं गायघाट, औराई और सकरा। वहीं बीजेपी के पास कुरहानी और मुजफ्फरपुर की सीटें हैं। बोचहा में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई है। मुजफ्फरपुर को अगर दलगत हिसाब से भी देखें तो यहां जनता पार्टी ने दो बार 1977 और 1980 में जीत हासिल की थी। जनता दल ने तीन बार 1989, 1991 और 1996 में जीत दर्ज की थी। 1998 में आरजेडी ने जीत दर्ज की और फिर 1999, 2004, 2009 में जेडीयू की जीत हुई। 1952 से लेकर 1971 तक कांग्रेस के पास मुजफ्फरपुर की सीट जरूर रही। मगर, 1984 के बाद से यहां कभी कांग्रेस जीत दर्ज नहीं कर पायी है। 2019 में महागठबंधन और एनडीए के बीच यहां सीधी लड़ाई होने के आसार हैं।

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