लोकसभा चुनाव 2019: मंदसौर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश की मंदसौर लोकसभा सीट से सांसद भाजपा के सुधीर गुप्ता हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस की कद्दावर नेता मीनाक्षी नटराजन को 3 लाख 3 हजार 649 मतों से हराकर यहां ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस, नंबर 3 आप थी। इस चुनाव में यहां कुल वोटरों की संख्या 16 लाख 26 हजार 571 थी, जिनमें से मात्र 11,61,349 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया जिसमें पुरुषों की संख्या 6,40,484 और महिलाओं की संख्या 5,20,865 थी। मंदसौर की 88 प्रतिशत आबादी हिंदुओं की और 9 प्रतिशत मुस्लिमों की है। मंदसौर को लंकापति रावण का ससुराल भी कहा जाता है।

profile of Mandsaur lok sabha constituency

मंदसौर लोकसभा सीट का इतिहास

मंदसौर संसदीय क्षेत्र की कुल जनसंख्या 24 लाख 72 हजार 444 है, जिसमें से 75 प्रतिशत आबादी गांवों में और 24 प्रतिशत जनसंख्या शहरों में निवास करती है। इस संसदीय क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें आती हैं जिनके नाम हैं ,मंदसौर, सुवासरा, मल्हारगढ़, गरोठ, नीमच, जावरा, मनासा और जावद। साल 1962 से लेकर 1971 तक के चुनाव में यहां पर भारतीय जनसंघ का राज रहा है,साल 1971 में यहां से लक्ष्मीनारायण सांसद बने थे लेकिन इसके बाद साल 1977 के चुनाव में उन्होंने भारतीय लोकदल के टिकट पर यहां जीत दर्ज की । साल 1980 और 1984 के चुनावों में यहां कांग्रेस ने राज किया, साल 1989 के चुनाव में लक्ष्मी नारायण पांडे यहां भाजपा के टिकट पर विजयी हुए और लोकसभा पहुंचे और इसके बाद 1991, 1996, 1998, 1999 और 2004 तक वो ही भाजपा के टिकट पर यहां के सांसद रहे, साल 2009 के चुनाव में यहां पर कांग्रेस की कद्दावर लोकप्रिय नेता मीनाक्षी नटराजन विजयी हुईं लेकिन साल 2014 के चुनाव में उन्हें भाजपा नेता सुधीर गुप्ता के हाथों शिकस्त का सामना करना पड़ा।

सुधीर गुप्ता का लोकससभा में प्रदर्शन

भाजपा की बड़ी हस्तियों में शामिल सुधीर गुप्ता को हाल ही में फेम इंडिया के सर्वे में देश के टॉप 25 सांसदों की लिस्ट में शामिल किया गया था, दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक सुधीर गुप्ता की लोकसभा में उपस्थिति 89 प्रतिशत रही है तो वहीं इस दौरान उन्होंने 354 डिबेट में हिस्सा लिया और 980 प्रश्न पूछे हैं।

मंदसौर, परिचय प्रमुख बातें-

पुरातात्विक और ऐतिहासिक विरासत को संजोए उत्तरी मध्य प्रदेश का मंदसौर एक ऐतिहासिक जिला है, जो की अफीम उत्पादन के लिए पूरे भारत में जाना जाता है, इसका प्राचीन नाम दशपुर था, आजादी के पहले यह ग्वालियर रियासत का हिस्सा था। मंदसौर हिन्दू और जैन मंदिरों के लिए खासा लोकप्रिय है, पशुपतिनाथ मंदिर, बाही पारसनाथ जैन मंदिर और गांधी सागर बांध यहां के मुख्य दर्शनीय स्थल हैं। हालांकि पिछले कुछ वक्त से किसानों की हत्या, नाबालिग से रेप और नगर पालिका अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार के मर्डर जैसे घृणित अपराधों की वजह से ये सुर्खियों में रहा है और इन मुद्दों पर जमकर सियासत भी हुई है।

मंदसौर लंबे वक्त से भाजपा का गढ़ रहा है, यहां भाजपा के किले को ध्वस्त करना आसान नहीं है लेकिन इस वक्त राज्य में बीजेपी के विपरीत हालात बने हुए हैं, शिवराज सिंह चौहान का राज यहां खत्म हो गया है और राज्य में कांग्रेस की सरकार है, ऐसे में क्या एक बार फिर से ये सीट भाजपा की झोली में आएगी या फिर साल 2009 की तरह हमें यहां एक बार फिर से बड़ा उलटफेर देखने को मिलेगा, ये एक बड़ा सवाल है, जिसका उत्तर हमें चुनावी नतीजे देंगे।

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