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लोकसभा चुनाव 2019: कैराना लोकसभा सीट के बारे में जानिए

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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद राष्ट्रीय लोक दल की तबस्सुम हसन हैं। पिछले साल इस सीट पर हुए उपचुनाव में तबस्‍सुम हसन ने बीजेपी प्रत्‍याशी मृगांका सिंह को 44,617 वोटों से हराया था। ये हार भाजपा के लिए इसलिए बड़ा झटका थी क्योंकि तबस्सुम हसन बसपा, सपा, कांग्रेस का समर्थन लेकर कैराना उपचुनाव में उतरीं थी और उन्होंने यहां से जीतकर सफलता का नया अध्याय लिखा। आपको बता दें कि तबस्सुम हसन को यहां पर कुल 481,182 वोट मिले थे, जबकि भाजपा की मृगांका सिंह को मात्र 436,564 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। इस सीट पर हुए उपचुनाव ने भारत में एक ऐसे सियासी समीकरण को जन्म दिया, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।

profile of Kairana lok sabha constituency

कैराना लोकसभा सीट का इतिहास

कैराना प्राचीन काल में कर्णपुरी के नाम से विख्यात था , यह बीसवीं सदी के मशहूर भारतीय संगीतज्ञ उस्ताद अब्दुल करीम खां की जन्मस्थली भी है। कैराना की कुल आबादी 2,323,008 है , जिसमें से 76 प्रतिशत लोग गांवों में और 23 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं, यहां पर 15 प्रतिशत लोग एससी वर्ग के हैं। इस सीट में पहला चुनाव 1962 में हुआ था और तब यहां से निर्दलीय राजनीतिज्ञ यशपाल सिंह पहले सांसद बने थे, इनके बाद 1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के घयूर अली खान यहां से एमपी चुने गए।1971 में पहली बार कांग्रेस कैराना में आई और शाफ्कुंत जुंग को यहां का सांसद बनाया, 1977 और 1980 में यहां जनता पार्टी का राज रहा लेकिन 1984 में हुए लोकसभा चुनाव में फिर कांग्रेस ने बाज़ी मारी और कांग्रेस के अख्तर हुसैन सांसद बने। इसके बाद 1989 और 1991 में लगातार 2 बार जनता दल के हरपाल सिंह पंवार सांसद बने, 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के मुनव्वर हसन विजयी हुए।

1998 में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार कैराना में अपना खाता खोला और वीरेंदर वर्मा को यहां का सांसद बनाया, 1999 में कैराना के सांसद बने राष्ट्रीय लोक दल के आमिर आलम खान और 2004 में राष्ट्रीय लोक दल की ही अनुराधा चौधरी कैराना की सांसद चुनी गईं, अनुराधा चौधरी 2012 में राष्ट्रीय लोक दल छोड़ के समाजवादी पार्टी में आ गईं और 2015 में उन्होंने भाजपा का हाथ थाम लिया, 2002 से 2004 तक अनुराधा चौधरी लोक निर्माण विभाग में मंत्री भी रहीं, 2009 में बहुजन समाज पार्टी से टिकट पर तबस्सुम हसन कैराना की सांसद बनीं लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के हुकुम सिंह यहां के सांसद चुने गए लेकिन 8 फ़रवरी 2018 को उनकी मौत के बाद 2018 में ही यहां उपचुनाव हुए जिसमें बड़ी राजनीतिक फेर बदल के तहत राष्ट्रीय लोक दल की तबस्सुम हसन भारतीय जनता पार्टी की मृगंका सिंह को हरा कर, कैराना की सांसद बनीं।

तबस्सुम हसन

मौजूदा सांसद तबस्सुम हसन राजनीति परिवार से ही आती हैं, 2014 में उनके ही बेटे नाहिद हसन ने ही हुकुम सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था , उनके पति मुनव्वर हसन भी कैराना से दो बार विधायक, दो बार सांसद रह चुके हैं। जाट और मुस्लिम वोटरों से प्रभावित इस सीट पर पलायन के मुद्दे ने काफी सुर्खियां बटोरीं थी, जिसके आगे भाजपा का इमोशनल कार्ड नहीं चल पाया और सियासत के नए फार्मूले ने उससे ये सीट छीन ली। 2014 के आंकड़ों के अनुसार इस सीट पर कुल 15,31,755 वोटर थे, इनमें 8,40,623 पुरुष और 6,91,132 महिला वोटर थीं जबकि 2018 में हुए उपचुनाव में इस सीट पर 4389 वोट नोटा को डाले गए थे, कैराना लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें पांच में से चार विधानसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में हैं।

कैराना की जीत ने देश में नए सियासी गणित को जन्म दिया है, यहां हुए उपचुनाव ने संदेश दिया है कि देश में बीजेपी के मोदी मैजिक को महागठबंधन के द्वारा टक्कर दी जा सकती है और इसी के तहत अब सपा और बसपा ने साथ में आकर भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है देखते हैं शह और मात के इस खेल में भाजपा कैसे महागठबंधन का सामना करती है लेकिन एक बात पूरी तरह से साफ है कि इस चुनावी जंग में जीत का सेहरा उसी के सिर बंधेगा, जिसके नाम पर जनता मुहर लगाएगी और उसका फैसला क्या है, इसे जानने के लिए हमें चुनावी नतीजों का इंतजार करना पड़ेगा।

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English summary
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