लोकसभा चुनाव 2019- हाजीपुर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: बिहार की हाजीपुर लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के प्रमुख रामविलास पासवान है। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर दो पर कांग्रेस, नंबर तीन पर JDU और चार पर IND रही थी। उस साल यहां पर मतदाताओं की संख्या 16 लाख 49 हजार 547 थी, जिसमें से मात्र 9 लाख 4 हजार 753 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 4 लाख 78 हजार 252 और महिलाओं की संख्या 4 लाख 26 हजार 501 रही थी। रामविलास पासवान कुल नौ बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा के सांसद रहे हैं, इनमें से ज़्यादातर बार उन्होंने इसी सीट से चुनाव जीता है, दो बार तो उन्हें इतने ज़्यादा वोट मिले की इतिहास बन गया।

profile of Hajipur lok sabha constituency

हाजीपुर लोकसभा सीट का इतिहास

इसी सीट पर पहली बार कांग्रेस के उम्मीदवार ने चुनाव जीता था तो वहीं बीजेपी और आरजेडी इस सीट पर खाता भी नही खोल सकी हैं। खास बात ये है कि हाजीपुर लोकसभा सीट एससी के लिए आरक्षित है। 12 अक्टूबर 1972 को मुजफ्फरपुर से अलग होकर वैशाली के स्वतंत्र जिला बनने के बाद हाजीपुर इसका मुख्यालय बना, ऐतिहासिक महत्त्व होने के अलावा आज यह शहर भारतीय रेल के पूर्व-मध्य रेलवे का मुख्यालय है, इसके अंतर्गत 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं। 1957 के लोकसभा चुनाव में हाजीपुर लोकसभा सीट अस्तित्व में आई थी तब यहां पर कांग्रेस का वर्चस्व हुआ करता था। 1962 ,1967 और 1971 में भी यहां कांग्रेस का ही राज रहा लेकिन 1977 में हाजीपुर सीट एससी के लिए आरक्षित हो गई और कांग्रेस विरोधी लहर में भारतीय लोकदल के नेता राम विलास पासवान यहां से पहली बार सांसद चुने गए, उन्होंने उस बार 4 लाख 24 हजार 545 वोटों से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।

1980 में एक बार फिर राम विलास पासवान चुनाव जीते लेकिन इस बार पासवान जनता पार्टी (सेक्यूलर) से चुनाव लड़े थे। साल 1984 में पासवान लोकदल के टिकट पर यहां से चुनाव लड़े लेकिन उन्हें कांग्रेस के राम रतन राम से हार का सामना करना पड़ा था इसके बाद 1989 में पासवान जनता दल के टिकट पर चुनाव जीते और इस बार की जीत 1977 की जीत से भी बड़ी थी, इस बार पासवान ने कांग्रेस के महावीर पासवान को 5 लाख 4 हजार 448 वोटों से हराया था। 1991 में राम विलास पासवान सीट बदलकर रोसड़ा से चुनाव लड़े, तब जनता दल के राम सुन्दर दास चुनाव जीते। 1996 और 1998 के लोकसभा चुनाव में रामविलास पासवान जनता दल के टिकट पर हाजीपुर से सांसद चुने गए लेकिन 1999 में पासवान जेडीयू के टिकट पर हाजीपुर से लोकसभा पहुंचे थे। इसके बाद अक्टूबर 2000 में राम विलास पासवान ने लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की और साल 2004 के चुनाव में वो यहां से लोजपा के टिकट पर सांसद बने लेकिन साल 2009 में पासवान को हार का मुंह देखना पड़ा और वो जेडीयू के वरिष्ठ नेता राम सुन्दर दास से हार गए लेकिन साल 2014 के चुनाव में उन्होंने फिर से जीत के बाद वापसी की और 9वीं बार हाजीपुर से लोकसभा पहुंचे।

पासवान के बारे में कहा जाता है कि केंद्र में किसी भी दल की सरकार हो रामविलास पासवान मंत्री जरूर होंगे क्योंकि पासवान अटल बिहारी बाजपेयी की एनडीए सरकार में भी मंत्री थे तो यूपीए-1 की सरकार में वो मंत्री बने थे। 2014 के चुनाव में पासवान एनडीए के साथ जुड़ गए और केन्द्रीय मंत्री बने। पिछले चुनाव की तुलना में अब सियासी हालात बदल चुके हैं, आज भाजपा और जेडीयू साथ है तो वहीं इस बार सीटों के बंटवारे के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक के रूप में लोजपा को बिहार में छह सीटें मिली हैं। जिसमें इस बार हाजीपुर से पशुपति कुमार पारस चुनाव लड़ेंगे क्योंकि पार्टी अध्यक्ष रामविलास पासवान को असम से राज्यसभा भेजा जाएगा। भले ही पासवान ने इस सीट से इतिहास रचा हो लेकिन इस इलाके में आज भी मूलभूत समस्याओं की कमी है। बिजली की समस्या से जूझ रहे इस इलाके की ग्रामीण सड़कें बदहाल हैं। तो वहीं अस्पताल और शिक्षण संस्थान भी विकास के लिए तरस रहे हैं, ऐसे में विकास के नाम पर वोट मांगने वाली भाजपा और उसके सहयोगी दल को इस बार हाजीपुर की जनता चुनेगी, ये एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब हमें और आपको चुनावी नतीजे देंगे।

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