लोकसभा चुनाव 2019: ग्वालियर लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: मध्यप्रदेश की ग्वालियर लोकसभा सीट से सांसद भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर हैं। नरेंद्र सिंह तोमर ने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक सिंह को 29 हजार 699 वोट से हरा कर विजय हासिल की थी। तोमर मोदी मंत्रीमंडल में भारत के केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज ,पेयजल और स्वच्छता मंत्री भी हैं। इस सीट पर नंबर 2 पर कांग्रेस, नंबर 3 पर बसपा और नंबर 4 पर आप थी। 2014 के आम चुनाव में इस सीट पर कुल वोटरों की संख्या 18,77,003 थी, जिसमें 9,90,912 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था। इनमें पुरुषों की संख्या 5,95,934 और महिलाओं कीं संख्या 3,94,978 थी। ग्वालियर की कुल आबादी 27,30,472 है जिसमें से 51 प्रतिशत लोग गांवों में और 48 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं। ग्वालियर की 90 प्रतिशत लोग हिंदू धर्म में और 6 प्रतिशत लोग इस्लाम धर्म में यकीन रखते हैं।

profile of Gwalior lok sabha constituency

ग्वालियर लोकसभा सीट का इतिहास

ग्वालियर सीट अधिकतर समय सिंधिया राजघराने से संबंधित रही है। 1962 में सबसे पहले यहां राजमाता विजयराजे सिंधिया जनसंघ के टिकट पर जीतीं थी। साल 1984-1989-1991-1998 में माधवराव सिंधिया कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से सांसद बने, यही नहीं 1996 के चुनाव में माधवराव सिंधिया मध्य प्रदेश विकास कांग्रेस के टिकट पर भी इस सीट से सांसद चुने गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी 1971 में जनसंघ के टिकट पर इस सीट से सांसद बने थे। साल 2007 (उप चुनाव), 2009 में बीजेपी के टिकट पर यशोधरा राजे सिंधिया इस सीट से सांसद चुनी गई थीं तो वहीं साल 2014 के चुनाव में यहां से भाजपा के दिग्गज नेता नरेंद्र सिंह तोमर ने एक बड़ी जीत दर्ज की थी । कुल मिलाकर 1952 में यह सीट हिंदू महासभा, 1957-1984-1989-1991-1998-2004 में कांग्रेस,1980-1999-2007-2009 में बीजेपी ने जीती है तो वहीं 1962-1967-1971 में जनसंघ ने और 1977 में जनता पार्टी यहां से विजयी रही है।

ग्वालियर, एक परिचय- प्रमुख बातें-

गुर्जर, तोमर और कछवाहा राजवंशो की राजधानी रहा ग्वालियर, बहुत सारे ऐतिहासिक स्थलों को अपने आंचल में समेटे हुए है, इसका गौरवशाली इतिहास रहा है। आज ग्वालियर एक आधुनिक शहर है और एक जाना-माना औद्योगिक केन्द्र भी। ग्वालियर को गालव ऋषि की तपोभूमि भी कहा जाता है। ग्वालियर शहर का सबसे बड़ा आकर्षण यहां ऊंची चट्टानों पर बना ग्वालियर का किला है। यह शहर के लगभग हर भाग से दिखाई देता है। भारत के दूसरे किलों की तुलना में मुगल बादशाह बाबर ने इसकी तुलना मोती से की थी।

ग्वालियर पर लंबे वक्त से भाजपा राज कर रही है और 1999 के बाद कांग्रेस यहां जीत को तरस रही है, इसमें कोई शक नहीं इस सीट पर भाजपा की पताका फहराने में शिवराज सिंह चौहान सरकार का भी बहुत बड़ा हाथ था, जिसने लंबे वक्त तक एमपी पर राज किया और उसका फायदा भाजपा को यहां मिला लेकिन अब सियासी समीकरण बदल चुके हैं, एमपी में कांग्रेस का सूखा समाप्त हो चुका है और वो सत्ता में है, ऐसे में क्या ये सीट एक बार फिर से कांग्रेस के खेमे में जाएगी, ये देखने वाली बात होगी तो वहीं इस सीट पर भाजपा कैसे अपनी प्रतिष्ठा बचाकर रखती है, इस पर भी सबकर नजर रहेगी, कुल मिलाकर इस बार इस सीट पर रोमांचक मुकाबला देखने के मिलेगा ऐसी उम्मीद की जा सकती है।

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