ई अहमद की वजह से इराक में रिहा हो सके थे तीन भारतीय ट्रक ड्राइवर

पिछले 25 वर्षो से लोकसभा सांसद थे पूर्व केंद्रीय मंत्री ई अहमद । वर्ष 2004 में इराक में अपहृत तीन भारतीयों को रिहा कराने में अदा की थी बड़ी भूमिका।

नई दिल्‍ली। मंगलवार को बजट सत्र के शुरू होते ही जब राष्‍ट्रपति का अभिभाषण जारी था तो पूर्व केंद्रीय मंत्री ई अहमद को दिल का दौरा पड़ा। उन्‍हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां पर मंगलवार देर रात 2:15 मिनट पर उनका निधन हो गया। अहमद पिछले 25 वर्षों से लोकसभा सांसद थे और वह सरकार में विदेश राज्‍यमंत्री रहे थे। बतौर विदेश राज्‍यमंत्री उन्‍होंने कई देशों के साथ भारत के संबंधों की दिशा में एक अहम भूमिका अदा की थी।

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गुरुवार को होगा अंतिम संस्‍कार

78 वर्ष के ई अहमद का योगदान अरब देशों के साथ भारत के डिप्‍लोमैटिक रिश्‍ते सुधारने में काफी अहम थी। अहमद इंडियन मुस्लिम लीग के नेता थे और केरल राज्‍य के ऐसे राजनेता थे जिनका कद राजनीति में काफी बड़ा था। बुधवार दोपहर दो बजे उनका शव केरल के कारिपुर स्थित हज हाउस लेकर जाया जाएगा और गुरुवार को यहीं पर उनका अंतिम संस्‍कार होगा। वर्ष 2004 में जब यूपीए की सरकार के समय ईराक में तीन भारतीय ट्रक ड्राइवरों का अपहरण हुआ तो उन्‍होंने अपे अंतराष्‍ट्रीय संपर्कों की मदद से तीनों भारतीयों की जान बचाई और उनकी सुरक्षित रिहाई कराई।

10 बार उंगा में किया भारत का प्रतिनिधित्‍व

  • ई अहमद केरल मल्‍लापुरम संसदीय क्षेत्र से आते थे और चार बार लोकसभा के लिए चुने गए थे।
  • उन्‍होंने 10 बार यूनाइटेड नेशंस जनरल एसेंबली में भारत का प्रतिनिधित्‍व किया था।
  • वह पहली बार वर्ष 1991 में चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे।
  • मई 2004 से मई 2009 तक वह देश विदेश राज्‍यमंत्री थे।
  • मई 2009 से जनवरी 2011 तक वह रेल राज्‍यमंत्री रहे।
  • जुलाई 2011 में उन्‍होंने मानव संसाधन विकास का जिम्‍मा बतौर राज्‍यमंत्री संभाला।
  • भारत से हज की यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के लिए उन्‍होंने कई प्रयास किए थे।
  • वेस्‍ट एशियन देशों के कई शासकों के साथ उनके काफी अच्‍छे संबंध थे।
  • उन्हें हज यात्रा के काबा को धोने की परंपरा के लिए आमंत्रण मिला था।
  • वह राजनीति में मुस्लिम स्‍टूडेंट्स फेडरेशन के जनरल सेक्रेटरी के तौर पर आए थे।
  • अपने शुरुआती दिनों में वह केरल विधानसभा से जुड़े थे।
  • वर्ष 1967, 1977, 1980, 1982 और 1987 में वह विधानसभा के लिए चुने गए।
  • वर्ष 1982 से 1987 क उन्‍होंने केरल सरकार में उद्योग मंत्री का पद संभाला था।
  • वह वर्ष 1971 से 1977 तक केरल स्‍टेट रुरल डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन रहे थे।
  • इसके बाद वर्ष 1979 से 1980 तक केरल की स्‍मॉल स्‍केल इंडस्‍ट्रीज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन में रहे।
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