लोकसभा चुनाव 2019: दौसा लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: राजस्थान की दौसा लोकसभा सीट से साल 2014 मे भाजपा के हरीश चंद्र मीणा सांसद बने। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर नंबर 2 पर डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और नंबर तीन पर कांग्रेस थी। लेकिन उन्होंने दिसंबर 2018 को सांसद पद से इस्तीफा दे दिया। साल 2018 में राजस्थान विधानसभा चुनावों के ठीक पहले हरीश चंद्र मीणा ने भाजपा का साथ छोड़ कर कांग्रेस का हाथ पकड़ लिया, जो कि बीजेपी के लिए करारा झटका है। गौर करने वाली बात यह है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में हरीश मीणा ने अपने ही बड़े भाई पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता नमो नारायण मीणा को दौसा में हराया था, यहां आपको ये भी बता दें कि हरीश मीणा पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। गहलोत सरकार में वह राजस्थान पुलिस के डीजीपी भी रह चुके हैं।

profile of Dausa lok sabha constituency

दौसा लोकसभा सीट का इतिहास

दौसा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें हैं। साल 1952, 1957 में इस सीट से कांग्रेस को कामयाबी मिली तो 1962, 1967 में स्वतंत्र पार्टी का यहां परचम लहराया। 1971 में कांग्रेस, 1977 में जनता पार्टी, 1980, 1984 में फिर कांग्रेस यहां लौटी। 1989 में बीजेपी की जीत के बाद 1991 से 2004 तक लगातार 5 बार यह सीट कांग्रेस के पास रही। कांग्रेस के दिवंगत नेता और राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट के पिता राजेश पायलट 1984, 1991, 1996, 1998 में यहां से सांसद रहे तो साल 2004 का आम चुनाव सचिन पायलट ने यहां से जीता था, 2009 में निर्दलीय उम्मीदवार किरोणी लाल मीणा यहां से चुनाव जीतकर सांसद बने थे लेकिन साल 2014 का चुनाव भाजपा ने यहां जीता और हरीश चंद्र मीणा सांसद की कुर्सी पर बैठे। गौर करने वाली बात यह है कि हरीश मीणा की जीत के साथ दौसा में भाजपा को 25 साल बाद विजय नसीब हुई थी। 1989 में नाथू सिंह गुर्जर ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। दौसा लोकसभा सीट पर अधिकतर कांग्रेस ही दबदबा रहा है।

दौसा, परिचय-प्रमुख बातें-

केवल सियासी तौर पर नहीं बल्कि ऐतिहासिक तौर पर भी दौसा काफी महत्वपूर्ण है, राजधानी जयपुर से 54 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दौसा का नाम देवगिरी पहाड़ी के नाम पर पड़ा है। दौसा कच्छवाह राजपूतों की पहली राजधानी थी। दौसा को देवनगरी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यहां के मंदिर में भगवान शिव के पांचों रूप, सहजनाथ, सोमनाथ, गुप्तेश्‍वर, शिव और नीलकंठ, विराजमान हैं तो वहीं अपने 'मेंहदीपुर बालाजी घंटा मंदिर' की वजह से दौसा आस्था का बड़ा केंद्र है। दौसा की जनसंख्या 25,20,397 है, जिसमें 88 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाकों में 11 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं।

गौरतलब है कि दौसा में मीणा और गुर्जर वोटों का खासा असर है। अब तक हुए चुनावी नतीजे यह ही बताते हैं कि मीणा और गुर्जर वोट एक पार्टी को नहीं पड़ता है। दोनों परस्‍पर विरोधी माने जाते हैं। ऐसा माना जाता रहा है कि राजस्‍थान में गुर्जर समुदाय बीजेपी के पक्ष में वोट करता है और मीणा समुदाय कांग्रेस के पक्ष में, लेकिन इस बार तस्वीर उलट है क्योंकि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व डिप्टी सीएम सचिन पायलट गुर्जर समुदाय से आते हैं और यहां के वर्तमान सांसद हरीश चंद्र मीणा का कांग्रेस में शामिल होने से भाजपा के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है, देखते हैं भाजपा इस जोड़ का क्या तोड़ निकालती है, कहना गलत ना होगा कि दौसा का मुकाबला भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए काफी कड़ा है |

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