लोकसभा चुनाव 2019: दाहोद लोकसभा सीट के बारे में जानिए
नई दिल्ली: गुजरात की दाहोद लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के जसवंत सिंह भाभोर हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने इस सीट पर कांग्रेस नेता डॉ. प्रभा किशोर को 230,354 वोटों से हराया था। जसवंतसिंह भाभोर को यहां पर 511, 111 वोट मिले थे तो वहीं डॉ. प्रभा किशोर को मात्र 280, 757 वोटों पर संतोष करना पड़ा था। इस सीट पर नंबर तीन पर सीपीएम थी, जिसे कि केवल 289, 58 वोट हासिल हुए थे।

दाहोद लोकसभा सीट का इतिहास
दाहोद लोकसभा सीट के अस्तित्व में आने के बाद इस सीट पर पहला आम चुनाव 1957 में हुआ था, जिसे कि कांग्रेस ने जीता था। साल 1962 में यहां पर स्वतंत्र पार्टी ने जीत दर्ज की तो वहीं साल 1967 का चुनाव में यहां पर कांग्रेस को सफलता मिली थी और तब से लेकर साल 1999 तक इस सीट पर सिर्फ और सिर्फ कांग्रेस का ही राज रहा और इस सीट से 7 बार लगातार कांग्रेस नेता सोमजी भाई डामोर सांसद के पद पर रहे। कांग्रेस की विजय यात्रा पर साल 1999 में भाजपा ने ब्रेक लगाया और बाबूभाई खीमाभाई यहां से सांसद चुने गए। साल 2004 का चुनाव भी उन्होंने यहां पर जीता लेकिन साल 2009 के चुनाव में एक बार फिर से यहां पर कांग्रेस की वापसी हुई लेकिन साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर फिर से भाजपा ने कब्जा किया और जसवंत सिंह भाभोर यहां से जीतकर लोकसभा पहुंचे।
जसवंत सिंह भाभोर का लोकसभा में प्रदर्शन
जसवंत सिंह भाभोर, केन्द्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री भी हैं। दिसंबर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 5 सालों के दौरान लोकसभा में इनकी उपस्थिति 90 प्रतिशत रही है और इस दौरान इन्होंने 11 डिबेट में हिस्सा लिया है और 138 प्रश्न पूछे हैं। साल 2014 के चुनाव में यहां पर कुल मतदाताओं की संख्या 14,11,765 थी, जिसमें से मात्र 9,00,381 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग किया था, जिसमें पुरुषों की संख्या 4,69,459 और महिलाओं की संख्या 4,30,922 थी।
दाहोद शहर, परिचय-प्रमुख बातें-
दाहोद शहर, गुजरात प्रांत का छोटा सा शहर है जो कि दूधूमति नदी के किनारे बसा हुआ है। ऐसा माता जाता है कि ऋषि दधीचि के नाम पर इस शहर का नाम दाहोद पड़ा है। ये शहर अहमदाबाद से 214 किमी की दूरी पर और वड़ौदा से 159 किमी की दूरी पर स्थित है। मुगल सम्राट औरंगजेब का जन्म दाहोद के किले में ही 1618 में हुआ था। केंद्र सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी योजना में गुजरात के इस शहर का चयन हुआ है। यहां की आबादी 24,36,636 है, जिसमें से 91 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में और 8 प्रतिशत लोग शहरी इलाकों में रहते हैं। यहां पर 2 प्रतिशत लोग एससी वर्ग के और 75 प्रतिशत लोग एसटी वर्ग के हैं और इसी वजह से ये लोकसभा सीट एसटी के लिए आरक्षित है।
दाहोद लोकसभा सीट कभी कांग्रेस का गढ़ कही जाती थी लेकिन पिछले चुनाव में मोदी लहर के बीच ये सीट भाजपा की झोली पर चली गई, जो कि कांग्रेस के लिए करारा झटका था लेकिन अब सियासी हालात बदले हुए हैं। गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शऩ किया है, जिसकी वजह से कांग्रेस के अंदर आत्मविश्वास की वृद्धि हुई है और इसी वजह से वो यहां अपनी हार का बदला लेने की पूरी कोशिश इस बार करेगी तो वहीं इसमें कोई शक नहीं कि इस सीट पर अपने प्रभु्त्व को बचाए रखने का दवाब भाजपा पर भी जबरदस्त होगा, देखते हैं कि यहां की जनता इस बार अपना आशीर्वाद किसे देती है क्योंकि शह और मात के इस खेल में विजयश्री उसे ही हासिल होगी जिसे कि जनता का साथ मिलेगा।












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