लोकसभा चुनाव 2019: बारडोली लोकसभा सीट के बारे में जानिए

नई दिल्ली: गुजरात के बारडोली लोकसभा सीट से मौजूदा सांसद भाजपा के प्रभुभाई वसावा हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस नेता तुषार चौधरी को 123,884 वोटों से हराया था। प्रभुभाई वसावा को 622,769 वोट हासिल हुए थे तो वहीं तुषार चौधरी को मात्र 498,885 वोट मिले थे। इस सीट पर नंबर तीन पर सीपीआई प्रत्याशी रीवाबेन चौधरी थे, जिन्हें 13,270 वोट मिले थे।

profile of Bardoli lok sabha constituency

बारडोली लोकसभा सीट का इतिहास

गुजरात की बारडोली संसदीय सीट साल 2008 के नए परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई। इस संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं। इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद साल 2009 के पहले आम चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के तुषार अमरसिंह चौधरी सांसद बने लेकिन साल 2014 का चुनाव यहां पर भाजपा नेता प्रभुभाई वसावा ने जीता और कांग्रेस के हाथ से यह सीट निकल गई। आपको बता दें कि प्रभुभाई वसावा कांग्रेसी थे और साल 2014 के चुनाव से ठीक पहले ही इन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन की थी।

प्रभुभाई वसावा का लोकसभा में प्रदर्शन

दिसबंर 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रभुभाई वसावा की पिछले पांच सालों के दौरान लोकसभा में उनकी उपस्थिति 77 प्रतिशत रही है और इस दौरान इन्होंने 17 डिबेट में हिस्सा लिया है और 254 प्रश्न पूछे हैं। साल 2014 के चुनाव में इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 16,14,106 थी, जिसमें से मात्र 12,06,179 लोगों ने अपने मतों का प्रयोग यहां पर किया था, जिनमें पुरुषों की संख्या 6,37,345 और महिलाओं की संख्या 5,68,834 थी।

बारडोली लोकलभा सीट, एक परिचय-प्रमुख बातें-

गुजरात का बारडोली जिला सूरत रीजन में आता है, बारडोली शहर 1918 में सरदार वल्लभभाई पटेल के 'नो टैक्स'आंदोलन का जन्म स्थान है। भारतीय स्वाधीनता संग्राम के दौरान गुजरात में हुआ यह एक प्रमुख किसान आंदोलन था जिसका नेतृत्व वल्लभ भाई पटेल ने किया था। इस सत्याग्रह आंदोलन के सफल होने के बाद वहां की महिलाओं ने वल्लभभाई पटेल को 'सरदार' की उपाधि प्रदान की थी, बाद में सरदार पटेल ने इस शहर से ब्रिटिश टैक्स के विरुद्ध भी आंदोलन आरंभ किया था, बारडोली में उस गौरवशाली इतिहास की यादगार के रूप में स्वराज आश्रम, उद्यान, संग्रहालय, खादी कार्यशालाएं और ऐतिहासिक अंबो भी है जो कि एक आम का पेड़ है जिसके नीचे महात्मा गांधी ने भारत के लिए होम-रूल की घोषणा की थी। बारडोली की जनसंख्या 20,34,778 है, जिसमें से 86 प्रतिशत लोग गांवों में और 13 प्रतिशत लोग शहरों में निवास करते हैं, यहां 2.37% लोग अनुसूचित वर्ग के और 65.86% लोग एसटी वर्ग के हैं और इसी वजह से ये लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।

गौरतलब है कि मोदी लहर में यह सीट कांग्रेस के हाथ से निकलकर भाजपा के खाते में आ गई जो कि कांग्रेस के लिए करारा झटका था। यही नहीं मोदी की वजह से ही गुजरात की सभी लोकसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा हुआ था लेकिन क्या इस बार भी ऐसा कुछ होगा या फिर अबकी बार की सियासी तस्वीर यहां से अलग होगी, यह एक देखने वाली बात होगी, कांग्रेस जहां इस वक्त हाल के तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में हुई जीत की वजह से आत्मविश्वास से भरी हुई है, वहीं दूसरी ओर भाजपा के ऊपर दवाब सीटों पर अपने वर्चस्व को बचाकर रखने का है , फिलहाल शह और मात के इस जंग में जीत उसी को नसीब होगी, जिसे कि जनता का आशीर्वाद मिलेगा और वो किसके साथ है इसका खुलासा चुनावी नतीजे करेंगे।

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