धार्मिक ट्रस्ट वाले बयान पर पृथ्वीराज चव्हाण ने दी सफाई, PM मोदी को बताई वाजपेयी सरकार की स्कीम
नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वजह से पिछले डेढ़ महीने से देश में लॉकडाउन जारी है। जिस वजह से देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। हाल ही में पीएम मोदी ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था। जिसके बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने सरकार को आर्थिक संकट से निकलने के लिए एक सलाह दी थी, जिस पर साधु-संत और बीजेपी भड़क गई। अब मामले में चव्हाण ने सफाई दी है।

दरअसल महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सरकार को धार्मिक ट्रस्टों के सोने का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था। उन्होंने वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में धार्मिक ट्रस्टों में एक ट्रिलियन से ज्यादा का सोना पड़ा है। कोरोना वायरस की वजह से देश की आर्थिक स्थिति सही नहीं है, ऐसे में सोने के बॉन्ड के माध्यम से कम ब्याज पर उधार लिया जाए। जिसके बाद बीजेपी ने उन पर हमला बोलते हुए कहा कि चव्हाण की नजर मंदिरों में रखे सोने पर है।
बीजेपी पर चव्हाण का पलटवार
इस मामले में सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि उनका बयान मंदिरों पर नहीं बल्कि सभी धार्मिक ट्रस्टों को लेकर था, लेकिन बीजेपी और मीडिया ने उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया। उन्होंने बीजेपी पर पलटवार करते हुए उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार की स्कीम याद दिलाई। उन्होंने बताया कि वाजपेयी सरकार ने 1999 में गोल्ड डिपॉजिट स्कीम शुरू की थी। जिसे 2015 में मोदी सरकार ने बदलकर गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम कर दिया। चव्हाण के मुताबिक वित्त राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने लोकसभा में खुद बताया था कि कई मंदिरों ने अपना सोना डिपॉजिट कर रखा है। आपको बता दें कि गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत बैंकों में सोना जमा करना रहता है। जिस पर ब्याज भी मिलता है। इस ब्याज पर सरकार टैक्स नहीं लेती है। बैंकों के मुताबिक ये ब्याज 2.25 से 2.50 फीसदी तक हो सकता है।












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