मुस्लिम बहुल बांग्लादेश में शुक्रवार को किस मंदिर का उद्घाटन करने जा रहे हैं राष्ट्रपति कोविंद? जानें
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कल यानी शुक्रवार को बांग्लादेश में मां काली के मंदिर का उद्घाटन करेंगे। जानें क्या है इस मंदिर की महत्ता।
नई दिल्ली, 16 दिसंबर। आज पूरा भारत 1971 के युद्ध में भारत की पाकिस्तान पर विजय का जश्न विजय दिवस के रूप में मना रहा है। भारत की पाकिस्तान पर इसी जीत से बांग्लादेश का जन्म हुआ था। बांग्लादेश के विजय दिवस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बांग्लादेश की यात्रा पर हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद कल यानी शुक्रवार को यहां मां काली के मंदिर का उद्घाटन करेंगे। इस मंदिर के उद्घाटन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं कि आखिर मुस्लिम बहुल राष्ट्र में राष्ट्रपति कोविंद द्वारा काली के मंदिर के उद्घाटन का क्या मतलब है? आखिर इस मंदिर की क्या खासियत है?

अल्पसंख्यकों पर पाकिस्तान के जुल्मों की याद दिलाता है मंदिर
जैसा कि हम सब जानते हैं कि भारत और बांग्लादेश दोनों पाक्सितान पर 1971 की जीत का जश्न मनाते हैं। इस मौके पर राष्ट्रपति कोविंद बांग्लादेश में जिस रमना काली मंदिर का उद्घाटन करने जा रहे हैं वह पाकिस्तान की सेना द्वारा पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में अल्पसंख्यकों की भयावहता और यातना की याद दिलाता है।
ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान हो गया था नष्ट
दरअसल साल 1970 में जब पाकिस्तान में चुनाव हुए तो शेख मुजीबुर रहमान ने अवामी लीग नाम से पार्टी बनाई और पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी के नेता जुल्फिकार अली भुट्टो के खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया। मुजीबुर रहमान को उनके समर्थक मुजीब के नाम से बुलाते थे। सौभाग्य से मुजीबुर रहमान की पार्टी पूर्वी पाकिस्तान में भुट्टो की पार्टी को हराने में सफल रही। इस बात से तिलमिलाए भुट्टो ने मुजीबुर रहमान और उनके समर्थकों को कुचलने का फैसला किया और इसके लिए पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना भेजी।
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इस अभियान को ऑपरेशन सर्चलाइट का नाम दिया गया। पाकिस्तानी सेना के इस अभियान में पूर्वी पाकिस्तान में स्थित रमना काली मंदिर भी क्षतिग्रस्त हो गया। 27 मार्च, 1971 को पाक सेना ने रात में मंदिर परिसतर में हमला किया इस मंदिर में मां आनंदमयी का आश्रम भी था। पाकिस्तानी सेना ने मंदिर परिसर में घुसकर वहां मौजूद सभी लोगों को मौत के घाट उतार दिया। मंदिर के अंदर मौजूद लगभग 100 से अधिक लोग मारे गए, जिनमें महिला और बच्चे भी शामिल थे। इसके अलावा मंदिर मलवे में बदल गया।
अब दोबारा बनकर तैयार मंदिर
लेकिन अब यह मंदिर दोबारा से बनकर तैयार है और राष्ट्रपति कोविंद इसका उद्घाटन करने जा रहे हैं। इस मंदिर का उदय पाकिस्तान द्वारा धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे आतंक के खिलाफ एकजुटा की लड़ाई का प्रतीक लगता है। इस कदम से बांग्लादेशी सरकार ने यह आश्वासन देने की कोशिश की है कि देश में रह रहे हिंदू अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों को कोई हानि नहीं होगी।












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