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NRC को लेकर अमित शाह के बयान पर भड़के प्रशांत किशोर, ट्वीट कर पूछा ये बड़ा सवाल

एनआरसी के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान को लेकर अब प्रशांत किशोर ने ट्वीट कर एक बड़ा सवाल पूछा है।

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    NRC पर BJP से अलग JDU के सुर, Prashant Kishor ने Tweet कर जताया विरोध । वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। एनआरसी के मुद्दे को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को संसद में बयान दिया कि एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस को पूरे देश में लागू किया जाएगा। अमित शाह ने कहा कि एनआरसी में भारत के सभी लोगों को शामिल किया जाएगा, फिर चाहे वो किसी भी धर्म के हों। अमित शाह के इस बयान को लेकर जहां टीएमसी और कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, वहीं अब जेडीयू नेता और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी एनआरसी के मुद्दे पर बयान दिया है।

    'एनआरसी पर कितने राज्यों के साथ चर्चा की'

    'एनआरसी पर कितने राज्यों के साथ चर्चा की'

    अमित शाह के बयान के बाद प्रशांत किशोर ने ट्वीट करते हुए कहा, 'भारत की 55 फीसदी से अधिक आबादी वाले 15 से ज्यादा राज्य ऐसे हैं, जहां भाजपा के मुख्यमंत्री नहीं हैं। आश्चर्य है कि उनमें से कितने राज्यों के साथ चर्चा की गई है कि वो अपने-अपने राज्यों में एनआरसी को लागू करने के लिए तैयार हैं।'

    एनआरसी पर ममता बनर्जी ने क्या कहा

    वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अमित शाह के बयान पर पलटवार किया है। मुर्शिदाबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, 'तृणमूल कांग्रेस सरकार पश्चिम बंगाल में कभी भी एनआरसी को लागू करने की अनुमति नहीं देगी। बंगाल में रहने वाली जनता की नगरिकता कोई भी नहीं छीन सकता। पश्चिम बंगाल की सरकार सांप्रदायिक आधार पर लोगों को विभाजित नहीं करती।' ममता बनर्जी ने चुनौती देते हुए कहा कि सरकार यह भी स्पष्ट करे कि 31 अगस्त को असम में लाए गए अंतिम एनआरसी से 14 लाख हिंदुओं और बंगालियों के नाम क्यों छोड़ दिए गए।

    पूरे देश में लागू करेंगे एनआरसी- अमित शाह

    पूरे देश में लागू करेंगे एनआरसी- अमित शाह

    इससे पहले बुधवार को राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, 'एनआरसी की प्रक्रिया पूरे देश में लागू की जाएगी। किसी भी धर्म के किसी व्यक्ति को इससे डरने की जरूरत नहीं है। यह केवल एक प्रक्रिया है, जिसमें हर किसी को एनआरसी के तहत लाया जाएगा। एनआरसी में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो अन्य धर्मों के लोगों को बाहर करे। जिन लोगों का नाम एनआरसी में नहीं है, उनके पास ट्रिब्यूनल जाने का पूरा अधिकार है। अगर किसी व्यक्ति के पास ट्रिब्यूनल के पास जाने के लिए पैसा नहीं है, तो सरकार वकील के लिए भी लागत वहन करेगी।'

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