प्रशांत किशोर ने कहा- फिर से पीएम बनेंगे मोदी, नीतीश दावेदार नहीं
नई दिल्ली। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने कहा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ही हैं और आगामी लोकसभा चुनाव के बाद वो एक बार फिर से पीएम बनेंगे। किशोर ने कहा कि राजग के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले से हैं और आगे भी वही रहेंगे। ऐसे में किसी और की उम्मीदवारी का सवाल ही कहां उठता है। राजग में नीतीश कुमार के होने का मतलब यह नहीं कि वे प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं।

नीतीश बड़े कद के नेता
प्रशांत किशोर से जब नीतीश कुमार के प्रधानमंत्री और उप प्रधानमंत्री बनने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई चर्चा नहीं हुई है। नीतीश कुमार एक बड़े नेता हैं। वे बिहार जैसे बड़े राज्य के करीब 15 साल से मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में उनका कद तो बड़ा है लेकिन उन्हें प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में देखना ठीक नहीं होगा। नीतीश कुमार देश के बड़े नेता हैं और उनकी राष्ट्रीय राजनीति में दूसरी भी कई भूमिकाएं हो सकती हैं।

उद्धव से मुलाकात के कोई मायने ना निकालें
प्रशांत किशोर पिछले दिनों शिवसेना प्रमुख उद्वव ठाकरे से मिले थे। संजय राउत से भी उनकी मुलाकात हुई। प्रशांत ने बताया कि इस दौरान चुनाव से जुड़े मसलों पर बात हुई, लेकिन इसके कोई और मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शिवसेना भी राजग का हिस्सा है। प्रशांत किशोर ने महागठबंधन को लेकर कहा कि किसी भी गठबंधन में चार से अधिक दल हैं तो मंच पर फाइलों में मजबूत दिख सकते हैं, पर जमीन पर कितनी सफलता देंगे, कहना मुश्किल है। इतने दलों को मैनेज करना भी बड़ी बात है।

प्रियंका के पास जादू की छड़ी नहीं
प्रियंका गांधी की कांग्रेस में एंट्री पर प्रशांत किशोर ने कहा कि प्रियंका गांधी ने शुरुआत की है, किसी के पास भी जादू की छड़ी नहीं है। मैं इतने कम समय में उन्हें बहुत बड़ी चुनौती नहीं मानता हूं। ऐसा इसलिए नहीं है कि प्रियंका गांधी के अंदर काबिलियत नहीं है बल्कि इतने कम समय में बड़ी छाप छोड़ पाना बहुत मुश्किल है। हां लंबे समय की बात करें तो प्रियंका गांधी बड़ा चेहरा हैं और बड़ा नाम हैं। प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर हम सब ये सोचें कि इतने कम समय में कांग्रेस जैसी पुरानी पार्टी में प्रियंका गांधी या कोई भी नेता बदलाव लाएगा तो ऐसा सोचना न्यायसंगत नहीं होगा। इसके लिए प्रियंका गांधी को 2-3 साल का समय दिया जाना चाहिए ताकि लोग उनके बारें में आंकलन करने की बेहतर स्थिति में हों।












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